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Saturday, August 22, 2026

शौर्य और बलिदान की मिसाल बना मौधा, शहीद स्मारक की वर्षगांठ पर 44 अमर वीरों को दी श्रद्धांजलि

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फर्रुखाबाद। जिले का मौधा गांव एक बार फिर देशभक्ति, शौर्य और बलिदान की भावना का साक्षी बना। शहीद स्मारक की स्थापना दिवस पर आयोजित सम्मान समारोह में भारतीय सेना के अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले 44 अमर वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी एवं जनसेवक अभय सिंह ने की। मौधा उनका पैतृक गांव है और वे प्रत्येक वर्ष शहीदों की स्मृति में इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित कराते हैं।

समारोह में राजपूताना राइफल्स के कर्नल ए.पी. चौहान मुख्य रूप से मौजूद रहे। उन्होंने शहीदों के परिजनों और पूर्व सैनिकों को सम्मानित करते हुए कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सैनिकों का त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, शहीद परिवार, युवा और ग्रामीण शामिल हुए।

मौधा गांव को पूरे प्रदेश में ‘फौजी गांव’ के नाम से भी जाना जाता है। यहां की मिट्टी में देशभक्ति की ऐसी परंपरा है कि बेटे के शहीद होने पर परिवार मातम नहीं, बल्कि देश के लिए बलिदान पर गर्व करता है। यही कारण है कि यह गांव लंबे समय से सेना को वीर सपूत देता आ रहा है।

गांव का शहीद स्मारक देश की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले 44 वीर जवानों की स्मृति में बनाया गया है। इन वीरों ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (IPKF) के अभियान तक विभिन्न युद्धों और सैन्य अभियानों में सर्वोच्च बलिदान दिया। इस स्मारक का लोकार्पण 5 जुलाई 2015 को तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री Rajnath Singh ने किया था।

मौधा की पहचान केवल शहीदों के गांव के रूप में ही नहीं, बल्कि सेना को निरंतर जवान देने वाले गांव के रूप में भी है। वर्तमान में गांव के 350 से अधिक युवा भारतीय सेना की विभिन्न रेजिमेंटों में सेवा दे रहे हैं, जबकि 200 से अधिक पूर्व सैनिक गांव में निवास कर रहे हैं। सेना में भर्ती होकर देश सेवा करना यहां के युवाओं के लिए परंपरा और गौरव का विषय माना जाता है।

समाजसेवी अभय सिंह ने कहा कि शहीदों का सम्मान केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की स्थायी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि शहीद स्मारक के निर्माण और उसके संरक्षण के लिए वर्षों से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि शहीदों के सम्मान में आयोजित इस अभियान को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ही उन्होंने वर्ष 2015 में तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह को मौधा बुलाकर शहीद स्मारक का लोकार्पण कराया था।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और शहीदों के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया तथा अमर वीरों को पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

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