आगरा
सदर तहसील में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। महीनों से लंबित मामलों और कथित भ्रष्टाचार के चलते आम नागरिक दफ्तरों के लगातार चक्कर लगाने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, वे 11 महीने बाद भी मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बनवा सके हैं। वहीं, नवजात बच्चों के माता-पिता स्कूल प्रवेश और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की उम्मीद में तपती गर्मी और उमस के बीच सरकारी कार्यालयों के बाहर लंबी कतारों में खड़े रहने को विवश हैं।
पीड़ितों का आरोप है कि जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया अत्यधिक धीमी हो गई है। बिना रिश्वत दिए फाइलों पर कार्रवाई नहीं हो रही, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर लोग सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर काटने के बावजूद राहत नहीं पा रहे हैं। तहसील से लेकर नगर निगम तक लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो रहा। इससे आम जनता में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
बृहस्पतिवार को सदर तहसील स्थित एसडीएम न्यायालय कक्ष में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वालों की भारी भीड़ देखने को मिली। बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चों के साथ आए अभिभावक अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। आवास विकास निवासी मनोज ने बताया कि वह पिछले दो महीने से अपने बच्चे के स्कूल में प्रवेश के लिए जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भटक रहे हैं। वहीं पुलकित ने बताया कि वह अपनी दादी के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए करीब 11 महीने से सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सका।
लोगों ने प्रशासन से प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आम नागरिकों की परेशानियां और बढ़ेंगी। नागरिकों ने आरोप लगाया कि जल्द काम कराने के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।


