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Friday, July 3, 2026

क्या हम सचमुच जी रहे हैं, या केवल जीवन गुज़ार रहे हैं?

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शरद कटियार
दुनिया में करोड़ों लोग हैं, लेकिन यदि जीवन जीने के नजरिए से देखा जाए तो शायद इंसानों को तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है। यह वर्गीकरण धन, पद या प्रसिद्धि का नहीं, बल्कि सोच और जीवन जीने के तरीके का है। प्रश्न यह नहीं कि आप कौन हैं, बल्कि यह है कि आप किस तरह का जीवन जी रहे हैं।

पहली श्रेणी में वे लोग आते हैं जो केवल समय काटते हैं। उनके लिए हर सुबह एक मजबूरी होती है और हर शाम एक थकान। वे दिन, महीने और साल तो गुजार देते हैं, लेकिन कभी यह नहीं सोचते कि वे किस उद्देश्य के लिए जी रहे हैं। जीवन उनके लिए केवल जिम्मेदारियों का बोझ बन जाता है। वे सांस तो लेते हैं, लेकिन जीना भूल जाते हैं।

दूसरी श्रेणी में वे लोग हैं जो सिर्फ अपने लिए जीते हैं। उनका लक्ष्य सफलता, धन, पद और सुविधाएं होती हैं। वे मेहनत करते हैं, उपलब्धियां भी हासिल करते हैं, लेकिन उनका संसार केवल “मैं” तक सीमित रहता है। ऐसे लोग जीवन में बहुत कुछ पा लेते हैं, फिर भी भीतर कहीं एक खालीपन बना रहता है, क्योंकि केवल अपने लिए जीने से आत्मा को संतोष नहीं मिलता।

तीसरी श्रेणी सबसे अलग होती है। ये वे लोग हैं जो उद्देश्य के साथ जीते हैं। वे अपने सपनों को पूरा करते हैं, लेकिन दूसरों के जीवन में भी रोशनी लाने का प्रयास करते हैं। उनके लिए सफलता का अर्थ केवल अपनी ऊंचाई नहीं, बल्कि दूसरों को भी आगे बढ़ाने का अवसर देना होता है। ऐसे लोग चले जाने के बाद भी अपने कार्यों और विचारों से जीवित रहते हैं।

विडंबना यह है कि हममें से अधिकांश लोग कभी-कभी जीवन जीने के बजाय केवल उसे गुजारने लगते हैं। सुबह से रात तक भागदौड़, काम का दबाव, सामाजिक अपेक्षाएं और भविष्य की चिंता हमें इतना व्यस्त कर देती हैं कि हम वर्तमान को महसूस करना ही छोड़ देते हैं। हम हंसते कम हैं, मुस्कुराते कम हैं, अपने लोगों के साथ बैठते कम हैं और स्वयं से बात तो शायद सबसे कम करते हैं।

जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी मृत्यु नहीं है। सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि इंसान जीते-जी जीना छोड़ देता है। वह अपने सपनों को टाल देता है, अपने रिश्तों को समय नहीं देता और अपनी खुशियों को भविष्य के भरोसे छोड़ देता है। फिर एक दिन पीछे मुड़कर देखता है तो महसूस होता है कि उसने जीवन बिताया बहुत, लेकिन जिया बहुत कम।

इसलिए समय-समय पर स्वयं से एक प्रश्न अवश्य पूछिए—मैं किस श्रेणी में हूँ? क्या मैं केवल दिन गिन रहा हूँ, केवल अपने लिए जी रहा हूँ, या ऐसा जीवन जी रहा हूँ जो मेरे साथ-साथ दूसरों के लिए भी मायने रखता है?

क्योंकि जीवन की लंबाई नहीं, उसकी गहराई महत्वपूर्ण होती है। जो इंसान उद्देश्य, संवेदनशीलता और आत्मसंतोष के साथ जीता है, वही वास्तव में जीवन को जीता है; बाकी लोग अक्सर सिर्फ उसे गुजारते रहते हैं।

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