– 62 गांव प्रभावित, 40 हजार से ज्यादा आबादी पर असर
– राहत, स्वास्थ्य और पशुधन सुरक्षा के लिए फील्ड में उतरा पूरा तंत्र
– एक्शन मे डीएम डॉ अंकुर लाठर, खुद ले रहीं फीडबैक
फर्रुखाबाद। गंगा का पानी चेतावनी बिंदु पार कर चुका है और जिले की तीन तहसीलें बाढ़ की मार झेल रही हैं। ऐसे में जिला प्रशासन ने राहत अभियान को महज कागजी तैयारी तक सीमित रखने के बजाय फील्ड ऑपरेशन में बदल दिया है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की निगरानी में राजस्व, सिंचाई, स्वास्थ्य, पशुपालन और पुलिस विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में सक्रिय हैं।
मौजूदा स्थिति में जिले के 62 गांव प्रभावित बताए गए हैं। इनमें सदर तहसील के 12, कायमगंज के 20 और अमृतपुर तहसील के 30 गांव शामिल हैं। बाढ़ का असर 40 हजार से अधिक लोगों के जनजीवन पर पड़ा है। प्रशासन की प्राथमिकता अब राहत सामग्री पहुंचाने के साथ-साथ लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, स्वास्थ्य सेवाएं बनाए रखना और पशुधन को सुरक्षित करना है।
136.90 मीटर पर गंगा, खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर नीचे
सिंचाई विभाग के अनुसार गंगा का जलस्तर 136.90 मीटर दर्ज किया गया है। जिले में चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर और खतरे का निशान 137.10 मीटर है। यानी नदी चेतावनी स्तर से 30 सेंटीमीटर ऊपर है, जबकि खतरे के निशान से अभी 20 सेंटीमीटर नीचे है। रामगंगा का जलस्तर भी 134 मीटर दर्ज किया गया है।
यही अंतर प्रशासन के लिए सबसे महत्वपूर्ण ‘विंडो’ है,पानी खतरे के निशान तक पहुंचे, उससे पहले प्रभावित परिवारों को सुरक्षित करने और राहत व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी।
डीएम ने संभाली कमान, गांवों में जाकर ले रहीं फीडबैक
डीएम डॉ. अंकुर लाठर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राहत कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो। प्रशासन की रणनीति में केवल नाव और राहत सामग्री ही नहीं, बल्कि भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, दवाएं, पशुओं के लिए चारा और सुरक्षित आश्रय को एक साथ जोड़ा गया है।
साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारियों को लगातार कैंप करने और ग्रामीणों से सीधे फीडबैक लेने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ की स्थिति बिगड़ने पर लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए शरणालयों को तैयार रखा गया है।
कटरी से कंट्रोल रूम तक,ग्राउंड पर प्रशासन
हालिया निरीक्षणों में अधिकारियों ने कटरी धर्मपुर सहित प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की और राहत व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानी। धारानगरी बाढ़ चौकी और रहमानिया कन्या इंटर कॉलेज स्थित बाढ़ शरणालय का भी निरीक्षण किया गया। शरणालयों में पेयजल, बिजली, शौचालय, प्रकाश, भोजन और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा की गई।
पशुधन को लेकर भी प्रशासन ने अलग रणनीति तैयार की है। बाढ़ शरणालयों में पशुओं को सुरक्षित रखने तथा नियमित टीकाकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को प्रभावित क्षेत्रों के आसपास 102 और 108 एंबुलेंस सेवाएं तैयार रखने को कहा गया है।
खेत डूबे, संपर्क मार्गों पर भी नजर
बाढ़ का सबसे बड़ा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। गंगा के किनारे के निचले इलाकों में खेतों में पानी भरने से फसलों पर संकट बढ़ा है। कई संपर्क मार्गों और विद्यालयों पर भी बाढ़ का असर पड़ा है। प्रशासन ने संवेदनशील मार्गों और जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी है।
राहत का अगला चरण अब ‘पानी कितना बढ़ा’ नहीं, ‘कितने लोग सुरक्षित हैं’ पर
गंगापार में इस समय प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ नदी के जलस्तर को नियंत्रित करना नहीं है। असली परीक्षा यह है कि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में कितनी तेजी से राहत सामग्री, नाव, चिकित्सा दल और सुरक्षित आश्रय प्रभावित परिवारों तक पहुंचते हैं।
जिले की आधिकारिक आपदा व्यवस्था के तहत पहले से बाढ़ राहत प्रबंधन योजना और जिला आपदा प्रबंधन योजना उपलब्ध है। अब इन्हीं व्यवस्थाओं को मौजूदा हालात के अनुरूप जमीन पर सक्रिय किया जा रहा है।
डीएम डॉ. अंकुर लाठर की फील्ड मॉनिटरिंग के बीच प्रशासन का फोकस साफ है,गंगा का जलस्तर बढ़े तो राहत की रफ्तार उससे तेज रहे। फिलहाल 62 प्रभावित गांव, 40 हजार से अधिक प्रभावित आबादी और खतरे के निशान के करीब पहुंचती गंगा जिले के लिए सबसे बड़े अलर्ट हैं।


