मोहित धवन
आधुनिक शिक्षा हमें डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी और उद्योगपति तो बना देती है, लेकिन क्या वह यह भी सिखाती है कि जीवन क्यों और कैसे जीना चाहिए? इसी मूल प्रश्न को केंद्र में रखकर मानव चेतना विकास केंद्र (MCVK), इंदौर पिछले लगभग दो दशकों से जीवन को समझने और उसे समग्रता के साथ जीने की दिशा में कार्य कर रहा है।
MCVK स्वयं को किसी धार्मिक संस्था, आश्रम या व्यक्तित्व विकास केंद्र के रूप में प्रस्तुत नहीं करता। इसका उद्देश्य व्यक्ति को जीवन के मूल प्रश्नों से परिचित कराना और अनुभव के माध्यम से उत्तर खोजने के लिए प्रेरित करना है। यहां किसी विचारधारा को स्वीकार करने का आग्रह नहीं किया जाता, बल्कि स्वयं विचार करने, प्रश्न पूछने और अनुभव से समझ विकसित करने पर बल दिया जाता है।
केंद्र का मानना है कि आज समाज की अधिकांश समस्याओं की जड़ संसाधनों का अभाव नहीं, बल्कि जीवन के प्रति अधूरी समझ है। यही अधूरी समझ परिवारों में तनाव, सामाजिक विघटन और व्यवस्थागत असंतुलन का कारण बनती है। इसलिए यहां परिवर्तन की शुरुआत बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि व्यक्ति की आंतरिक समझ से मानी जाती है।
हाल ही में आयोजित सात दिवसीय परिचय शिविर में प्रतिभागियों ने योग, प्राणायाम, सामूहिक श्रम, साझा भोजन और संवाद जैसे विभिन्न सत्रों में भाग लिया। इन गतिविधियों का उद्देश्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य या अनुशासन नहीं, बल्कि सहयोग, समानता, उत्तरदायित्व और आत्मबोध की भावना विकसित करना था।
शिविर की विशेषता यह रही कि प्रत्येक सत्र में प्रतिभागियों को जीवन से जुड़े मूल प्रश्नों—“मैं कौन हूँ?”, “मैं क्यों जी रहा हूँ?”, “परिवार और समाज के प्रति मेरी भूमिका क्या है?”—पर खुलकर विचार रखने और प्रश्न पूछने का अवसर दिया गया। यहां किसी निष्कर्ष को थोपने के बजाय समझ के आधार पर स्वयं निष्कर्ष तक पहुंचने की प्रक्रिया को महत्व दिया गया।
MCVK का लक्ष्य केवल सफल व्यक्तियों का निर्माण करना नहीं, बल्कि ऐसे जागरूक और उत्तरदायी नागरिक तैयार करना है, जो अपने परिवार, समाज, प्रकृति और व्यवस्था के प्रति संवेदनशील हों। केंद्र का मानना है कि जीवन को अलग-अलग हिस्सों में नहीं, बल्कि एक समग्र इकाई के रूप में समझने से ही स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव है।


