पुराने अतिथि शिक्षकों का नवीनीकरण स्वागतयोग्य, मगर नए शिक्षकों की कमी और निविदा प्रक्रिया पर सरकार को देनी होगी स्पष्ट जानकारी
शरद कटियार
सर्वोदय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को लेकर विद्यार्थियों के विरोध के बाद सरकार ने फिलहाल राहत का रास्ता निकाला है। समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण ने स्वयं स्वीकार किया कि विद्यालयों में शिक्षकों की समस्या थी और पहले से पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों की सेवाओं का नवीनीकरण कर दिया गया है। यदि इससे कक्षाएं नियमित होती हैं और विद्यार्थियों की पढ़ाई पटरी पर लौटती है तो यह निश्चित रूप से स्वागतयोग्य कदम है।
लेकिन शिक्षा व्यवस्था में किसी समस्या का समाधान केवल इतना नहीं हो सकता कि जो शिक्षक पहले से पढ़ा रहे हैं, उन्हें कुछ और समय के लिए बनाए रखा जाए। असली सवाल यह है कि सर्वोदय विद्यालयों में विषयवार जितने शिक्षकों की आवश्यकता है, क्या उतने शिक्षक उपलब्ध हैं? यदि किसी विद्यालय में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी या अन्य महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं हैं तो केवल पुराने शिक्षकों का नवीनीकरण उस कमी को पूरी तरह दूर नहीं कर सकता।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि विद्यार्थियों ने अपनी समस्या को लेकर आवाज उठाई। जब बच्चों को यह महसूस हुआ कि परीक्षा नजदीक है और पढ़ाई के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, तो उन्होंने विरोध का रास्ता अपनाया। सामान्य परिस्थितियों में विद्यार्थियों का सड़क पर उतरना उचित नहीं माना जा सकता, लेकिन उनकी शिकायतों को नजरअंदाज करना भी उससे बड़ा अन्याय होगा।
विद्यार्थियों का आंदोलन यह संदेश देता है कि विद्यालयों में केवल भवन, फर्नीचर और अन्य संसाधन पर्याप्त नहीं हैं।
विद्यालय की वास्तविक ताकत शिक्षक और नियमित शिक्षण व्यवस्था है। शिक्षक नहीं होंगे तो शानदार भवन भी शिक्षा का उद्देश्य पूरा नहीं कर पाएंगे। पहले से पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों को जारी रखने का निर्णय विद्यार्थियों के हित में तत्काल राहत दे सकता है। शिक्षक और विद्यार्थी के बीच कुछ समय में एक शैक्षणिक तालमेल बनता है। अचानक शिक्षक बदलने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसे में अनुभवी और पहले से कार्यरत शिक्षकों को बनाए रखना व्यावहारिक निर्णय है।
लेकिन यह व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं बन सकती। अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था कब तक चलेगी, उनकी सेवा शर्तें क्या होंगी और भविष्य में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति के लिए सरकार की क्या योजना है, इन सवालों के जवाब भी सामने आने चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न अभी भी यही है कि जिन विद्यालयों में शिक्षक नहीं हैं, वहां नए शिक्षक कब आएंगे? यदि किसी विद्यालय में स्वीकृत पदों के मुकाबले शिक्षक कम हैं तो उनकी विषयवार सूची सार्वजनिक होनी चाहिए। इससे अभिभावकों और विद्यार्थियों को भी वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
सरकार को प्रत्येक सर्वोदय विद्यालय का शिक्षक उपलब्धता मानचित्र तैयार करना चाहिए। किस विद्यालय में कितने शिक्षक हैं, कौन से विषयों में कमी है, कितने पद स्वीकृत हैं और कितने पद रिक्त हैं—यह जानकारी पारदर्शी तरीके से सामने आनी चाहिए। इससे समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाया जा सकेगा।
अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था आउटसोर्सिंग के माध्यम से संचालित होने और संबंधित संस्था के अनुबंध के नवीनीकरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि अनुबंध एक वर्ष के लिए था और उसकी मूल शर्तों में नवीनीकरण का स्पष्ट प्रावधान नहीं था, तो सरकार को यह बताना चाहिए कि नवीनीकरण किस नियम, किस प्रक्रिया और किस सक्षम अधिकारी के निर्णय के आधार पर किया गया।
यह सवाल किसी व्यक्ति या संस्था को कठघरे में खड़ा करने के लिए नहीं, बल्कि सरकारी धन और सार्वजनिक व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। यदि नियम इसकी अनुमति देते हैं तो सरकार को नियम स्पष्ट करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। यदि नई निविदा आवश्यक थी तो उसके स्थान पर नवीनीकरण का आधार भी सार्वजनिक होना चाहिए।
सरकारी विद्यालयों में लंबे समय तक अस्थायी शिक्षकों पर निर्भरता अपने आप में चिंता का विषय है। अतिथि शिक्षक तत्काल आवश्यकता पूरी कर सकते हैं, लेकिन शिक्षा की निरंतरता के लिए स्थायी और पर्याप्त शिक्षक व्यवस्था जरूरी है।
खासकर आवासीय सर्वोदय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थी अक्सर ऐसे परिवारों से आते हैं जिनके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित वातावरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां शिक्षक की कमी का असर केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तक पहुंचता है।
पुराने अतिथि शिक्षकों का नवीनीकरण समस्या का अंत नहीं, बल्कि एक जरूरी अंतरिम राहत है। अब सरकार को अगला कदम उठाते हुए सभी सर्वोदय विद्यालयों में शिक्षकों की वास्तविक आवश्यकता का आकलन करना चाहिए और जहां कमी है वहां शीघ्र नियुक्ति की व्यवस्था करनी चाहिए।
विद्यार्थियों ने आंदोलन के जरिए अपनी बात सरकार तक पहुंचा दी है। सरकार ने भी उनकी एक प्रमुख मांग पर तत्काल कदम उठाया है। अब जरूरत इस बात की है कि इस अवसर को स्थायी सुधार में बदला जाए।
बच्चों को आंदोलन करने की जरूरत न पड़े, शिक्षक समय पर कक्षा में मौजूद हों और हर विषय की पढ़ाई नियमित हो,यही किसी भी सर्वोदय विद्यालय की सफलता का वास्तविक पैमाना होना चाहिए। फिलहाल अतिथि शिक्षकों का नवीनीकरण राहत जरूर है, लेकिन शिक्षक संकट का स्थायी समाधान अभी बाकी है।


