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Wednesday, August 19, 2026

936 ट्रेनिंग प्रोवाइडर्स संवारेंगे प्रदेश के 1 लाख से अधिक युवाओं का भविष्य

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युवाओं को कौशल से जोड़ने के लिए योगी सरकार की बड़ी पहल

सभी युवाओं के लिए एआई फॉर ऑल और फ्यूचरिस्टिक कोर्सेज हुए अनिवार्य

एसएसडीएफ योजना के दूसरे चरण में 1 अगस्त से शुरू होंगी कक्षाएं

सीसीटीवी से होगी निगरानी, लापरवाही पर की जाएगी कड़ी कार्रवाई

लखनऊ, 02 जुलाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के युवाओं को रोजगारपरक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कुशल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य कौशल विकास निधि (एसएसडीएफ) योजना के अंतर्गत अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण के दूसरे चरण का लक्ष्य आवंटन जारी कर दिया गया है।

प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्किल इंडिया’ विजन को साकार करते हुए उत्तर प्रदेश आज कौशल विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप युवाओं को टेक-सेवी बनाने के लिए हर बैच में 4 घंटे का ‘एआई फॉर ऑल’ और सॉफ्ट स्किल मॉड्यूल पढ़ाना अनिवार्य किया गया है। कोर्सेज की अधिकतम अवधि 900 घंटे तय की गई है और आवासीय सेंटर्स पर रोज कम से कम 8 घंटे की क्लास अनिवार्य होगी। पारदर्शिता के लिए पूरे सेंटर पर निर्धारित मानकों के अनुसार सीसीटीवी लगाना अनिवार्य किया गया है, जिससे मुख्यालय से सीधी निगरानी हो सके। साथ ही, युवाओं का सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए हर सेंटर पर रोज एक हिंदी और एक अंग्रेजी अखबार रखना होगा। नए सेंटर्स का उद्घाटन स्थानीय विधायक से कराना अनिवार्य होगा। संस्थाएं केवल एनसीवीईटी/एनक्यूआर पोर्टल पर लिस्टेड जॉब रोल ही चुन सकेंगी और डीपीएमयू द्वारा गहन जांच के बाद ही बैच को मंजूरी दी जाएगी।

योगी सरकार ने कौशल प्रशिक्षण को पूरी तरह पारदर्शी और परिणाममूलक बनाने के लिए इस बार लक्ष्य आवंटन की प्रक्रिया में ‘कौशल दर्पण’ एआई डैशबोर्ड का उपयोग किया है। जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (डीपीएमयू) से प्राप्त केंद्र कैपेसिटी सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर ही सभी 936 प्रदाताओं को लक्ष्य दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी प्रदाताओं को मिशन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आवंटित टारगेट पूरा करना और सभी बैचों का अप्रूवल लेना अनिवार्य होगा। आधुनिक उद्योगों की मांग को देखते हुए हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, आईटी-आईटीईएस, फूड प्रोसेसिंग, अपैरल और हैंडीक्राफ्ट्स जैसे न्यू-एज सेक्टर्स को विशेष प्राथमिकता दी गई है। न्यू-एज प्रशिक्षण प्रदाता अनिवार्य रूप से केवल फ्यूचरिस्टिक जॉब रोल में ही प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेंगे।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य मिलने का मतलब काम शुरू करना नहीं है। जब तक ट्रेनिंग प्रदाता मिशन के साथ लिखित एग्रीमेंट नहीं कर लेते और उसकी पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक डीपीएमयू बैच बनाने की अनुमति नहीं देगी। मिशन के पास बजट या जरूरत के हिसाब से टारगेट घटाने-बढ़ाने का अधिकार सुरक्षित है। यदि किसी संस्था ने समय पर क्लास शुरू नहीं की या ग्राउंड से कोई शिकायत मिली, तो योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बिना देर किए उनके खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि कुल 936 प्रशिक्षण प्रदाताओं को 1 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें 831 निजी, राजकीय व स्टार्ट-अप प्रशिक्षण प्रदाताओं को 91,425 युवाओं तथा 105 औद्योगिक/न्यू-एज प्रशिक्षण प्रदाताओं को 14,650 युवाओं का प्रशिक्षण लक्ष्य दिया गया है। इससे पहले अप्रैल में पहले चरण में 957 ट्रेनिंग प्रोवाइडर्स को 99 हजार से अधिक युवाओं के प्रशिक्षण का लक्ष्य आवंटित किया गया था, जिनका प्रशिक्षण वर्तमान में सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।

एसएसडीएफ योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को स्थानीय आवश्यकताओं और उद्योगों की मांग के अनुसार रोजगारपरक प्रशिक्षण देना है। ‘कौशल दर्पण’ डैशबोर्ड का उपयोग और एआई फॉर ऑल जैसे न्यू-एज व फ्यूचरिस्टिक मॉड्यूल्स को अनिवार्य करके हम उत्तर प्रदेश के युवाओं को भविष्य के वैश्विक बाजारों के लिए तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चयनित संस्थाओं को हर हाल में 01 अगस्त, 2026 से कक्षाएं शुरू करनी होंगी। इसके लिए 17-चरणों का कड़ा टाइम-टेबल जारी किया गया है, जिसमें सेंटर सिलेक्शन, सत्यापन, जागरूकता कैंप, बैच अप्रूवल से लेकर प्लेसमेंट तक की समय-सीमा तय है। कोर्स पूरा होने के बाद केवल 70% या अधिक उपस्थिति वाले छात्रों को ही रोजगार मेले में बैठने का मौका मिलेगा और रिजल्ट के 90 दिनों के भीतर प्लेसमेंट कराना होगा। नौकरी मिलने के बाद भी 365 दिनों तक ट्रैकिंग की जाएगी।

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