नई दिल्ली। यूरोप इस समय भीषण गर्मी और हीटवेव की चपेट में है। लगातार दूसरी बार आए प्रचंड लू के दौर ने फ्रांस, स्पेन, इटली, जर्मनी और ब्रिटेन समेत कई देशों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। अब तक पूरे महाद्वीप में 1300 से अधिक लोगों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं, जिनमें सबसे अधिक प्रभावित फ्रांस बताया जा रहा है। कई देशों में तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि प्रशासन ने अनेक क्षेत्रों में रेड अलर्ट जारी कर लोगों को घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है।
फ्रांस में गर्मी से हालात सबसे ज्यादा गंभीर हैं, जहां लगभग एक हजार अतिरिक्त मौतों की सूचना है। अस्पतालों में हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि कई मुर्दाघरों में क्षमता से अधिक शव पहुंचने की खबरें हैं। स्पेन, इटली और जर्मनी में भी अत्यधिक तापमान के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। जंगलों में आग का खतरा बढ़ गया है, स्कूलों का समय बदला गया है और कई सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इस भीषण गर्मी के पीछे ‘ओमेगा ब्लॉक’ और ‘हीट डोम’ जैसी मौसमीय परिस्थितियां जिम्मेदार हैं, जिनकी वजह से सहारा रेगिस्तान की गर्म हवाएं यूरोप के ऊपर फंस गई हैं। जलवायु परिवर्तन ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है। बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है, जिससे कई देशों में ब्लैकआउट का खतरा भी मंडरा रहा है।
स्थिति से निपटने के लिए यूरोपीय देशों ने स्कूल बंद करने, कार्यस्थलों के समय में बदलाव, कूलिंग सेंटर खोलने, सार्वजनिक स्थानों पर विशेष स्वास्थ्य सलाह जारी करने तथा बुजुर्गों और कमजोर वर्गों के लिए राहत उपाय लागू किए हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम प्रणाली जल्द नहीं बदली, तो आने वाले दिनों में यूरोप के कई हिस्सों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।


