नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए भारत की उपलब्धियों, आत्मनिर्भरता, रक्षा क्षेत्र, पर्यावरण संरक्षण, खेल, स्वदेशी उत्पादों और जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 का आधा हिस्सा पूरा होने जा रहा है और इन छह महीनों में देश ने कई ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन पर प्रत्येक भारतीय को गर्व होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जून महीने में भारत ने रक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज की हैं। उन्होंने हाल ही में कोलकाता में आयोजित नौसेना के कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस रिसर्चर और रिसर्चर अग्रे जैसे आधुनिक युद्धपोत पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार किए गए हैं। इसके अलावा डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल का सफल परीक्षण और भारत में निर्मित सी-295 परिवहन विमान की पहली उड़ान को भी उन्होंने देश की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे 40 विमान भारत में ही बनाए जा रहे हैं, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की मजबूत तस्वीर पेश करते हैं।
प्रधानमंत्री ने युवाओं में खेलों के बढ़ते उत्साह की भी सराहना करते हुए कहा कि आज देश के युवा खेलों को केवल मनोरंजन नहीं बल्कि करियर के रूप में भी अपना रहे हैं। इससे भारत का खेल भविष्य और अधिक मजबूत होगा।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने मेघालय के प्रसिद्ध जीवित जड़ों से बने रूट ब्रिज का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय वर्षों तक रबर के पेड़ों की जड़ों को दिशा देकर प्राकृतिक पुल तैयार करते हैं, जो समय के साथ और अधिक मजबूत होते जाते हैं। उन्होंने इसे प्रकृति के साथ सामंजस्य और स्थानीय लोगों की अद्भुत रचनात्मकता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा की महिलाओं की भी सराहना की, जिन्होंने प्लास्टिक कचरे का पुनः उपयोग कर आकर्षक कलाकृतियां और सजावटी पेड़ तैयार किए। उन्होंने इसे स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और नवाचार का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
गणेश चतुर्थी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों के बजाय मिट्टी की पर्यावरण अनुकूल मूर्तियां खरीदने तथा हर त्योहार पर स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने मानसून के मौसम को देखते हुए देशवासियों से वर्षा जल संरक्षण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बारिश की प्रत्येक बूंद अमूल्य है और इसे रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सोख्ता गड्ढों तथा अन्य उपायों के माध्यम से जमीन में पहुंचाकर भूजल स्तर बढ़ाया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की सामूहिक भागीदारी से ही आत्मनिर्भर, स्वच्छ और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार भारत का निर्माण संभव है।


