40.4 C
Lucknow
Saturday, June 27, 2026

तंत्र-मंत्र का बढ़ता कारोबार: जब जलन, लालच और अंधविश्वास रिश्तों को निगलने लगते हैं

Must read

-“जहाँ मेहनत हार मान लेती है, वहाँ अंधविश्वास, जलन और लालच का कारोबार शुरू हो जाता है।”
सूर्या अग्निहोत्री
(डिप्टी एडिटर यूथ इंडिया न्यूज़ ग्रुप)

आज का दौर विज्ञान, शिक्षा और तकनीक का है, लेकिन विडंबना यह है कि इसी दौर में अंधविश्वास और कथित तंत्र-मंत्र का कारोबार भी कई जगह तेजी से फल-फूल रहा है। जब कोई व्यक्ति मेहनत, ईमानदारी और अपनी योग्यता के दम पर किसी का मुकाबला नहीं कर पाता, तो कई बार वह शॉर्टकट तलाशने लगता है। इसी सोच का फायदा उठाकर कुछ लोग तंत्र-मंत्र के नाम पर डर, लालच और भ्रम का कारोबार खड़ा कर देते हैं।

सबसे दुखद बात यह है कि अब यह समस्या केवल अनजान लोगों तक सीमित नहीं रही। कई परिवारों में रिश्तों के बीच अविश्वास, ईर्ष्या और बदले की भावना इतनी बढ़ गई है कि लोग एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाने के लिए कथित तांत्रिकों का सहारा लेने लगते हैं। भाई-भाई से, रिश्तेदार रिश्तेदार से और पड़ोसी पड़ोसी से जलने लगता है। यह मानसिकता समाज के लिए बेहद चिंताजनक है।

विडंबना देखिए, जिन लोगों को कभी समाज संदेह की नजर से देखता था, आज कई जगह वही लोग चमत्कार और डर का माहौल बनाकर लोगों के घरों तक पहुंच जाते हैं। वे दावा करते हैं कि वे किसी का घर बर्बाद कर देंगे, किसी का कारोबार चौपट कर देंगे, किसी के रिश्ते तोड़ देंगे या किसी को अपने वश में कर देंगे। ऐसे दावों का कोई ठोस प्रमाण नहीं होता, लेकिन डर और अंधविश्वास के कारण लोग उनके चक्कर में फंस जाते हैं।

इस पूरे खेल की जड़ में जलन, लालच, बदले की भावना और धन का अहंकार है। जब इंसान यह सोचने लगता है कि “अगर मैं आगे नहीं बढ़ सकता तो सामने वाले को ही गिरा दूं”, तभी समाज का नैतिक पतन शुरू होता है। दूसरों को बर्बाद करने की सोच अंततः पूरे परिवार और समाज का नुकसान करती है।

इतना ही नहीं, समय-समय पर ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें कुछ कथित तांत्रिकों पर लोगों को अपने प्रभाव में लेकर आर्थिक ठगी, महिलाओं के साथ अशोभनीय व्यवहार, यौन उत्पीड़न, ब्लैकमेल और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। कई मामलों में पुलिस ने कार्रवाई कर ऐसे लोगों को गिरफ्तार भी किया है। यह दिखाता है कि अंधविश्वास का फायदा उठाकर कुछ लोग दूसरों की मजबूरी, डर और विश्वास का शोषण करते हैं। इसलिए किसी भी व्यक्ति के चमत्कारी दावों पर आंख बंद करके भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।

समाज को यह भी समझना होगा कि बिना प्रमाण किसी व्यक्ति पर तंत्र-मंत्र करने का आरोप लगाना भी गलत है। किसी विवाद या बीमारी का कारण बिना सबूत ऐसे दावों को मान लेना नुकसानदायक हो सकता है। समस्याओं का समाधान कानून, चिकित्सा, संवाद और मेहनत जैसे व्यावहारिक उपायों में ढूंढ़ना अधिक सुरक्षित और उचित है।

आज जरूरत इस बात की है कि बच्चों को अंधविश्वास नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सोच, नैतिकता और विवेक सिखाया जाए। रिश्तों को जलन से नहीं, विश्वास से मजबूत किया जाए। सफलता का रास्ता किसी को गिराने से नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने से निकलता है।

जब समाज में मेहनत की जगह शॉर्टकट, विश्वास की जगह शक और विवेक की जगह अंधविश्वास ले लेता है, तब केवल व्यक्ति नहीं, पूरा समाज कमजोर होता है। इसलिए जरूरी है कि लोग डर और भ्रम फैलाने वालों से सावधान रहें, किसी भी दावे को आंख बंद करके न मानें और यदि कोई व्यक्ति तंत्र-मंत्र के नाम पर ठगी, धमकी या किसी महिला के साथ दुर्व्यवहार करे, तो उसके खिलाफ कानून का सहारा लें। मजबूत समाज वही है जो सत्य, विवेक, कानून और आपसी विश्वास पर खड़ा हो—डर और अंधविश्वास पर नहीं।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article