लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों के कार्यकाल बढ़ाए जाने की संभावनाओं को बड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के सरकारी आदेशों पर कड़ी नाराजगी जताए जाने के बाद पंचायती राज विभाग बैकफुट पर आ गया है। ऐसे में जुलाई में समाप्त हो रहे जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों के कार्यकाल को आगे बढ़ाने की संभावना फिलहाल कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।
प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्षों का पांच वर्षीय कार्यकाल 11 जुलाई को, जबकि ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को समाप्त हो रहा है। इससे पहले ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को पूरा होने से पहले ही राज्य सरकार ने उन्हें प्रशासक के रूप में कार्य जारी रखने की अनुमति देने के आदेश जारी किए थे। हालांकि इस व्यवस्था पर हाईकोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-ई के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष का ही होगा और अवधि समाप्त होने से पहले नए चुनाव कराना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
न्यायालय ने यह भी कहा कि राज्य सरकार किसी अध्यादेश या कानून के माध्यम से पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ा सकती। अदालत ने सरकार के आदेशों को संविधान की भावना के विपरीत बताते हुए इस मामले में विस्तृत जवाब तलब किया है। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित है।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पंचायती राज विभाग आगे की कानूनी रणनीति तैयार करने में जुट गया है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि विभाग विधिक विशेषज्ञों की राय लेकर न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखेगा। वहीं, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची पहले ही प्रकाशित की जा चुकी है, जिससे चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने के संकेत भी मिल रहे हैं।


