– ईमानदार और काबिल नेताओं की भारी कमी
– आज हर योजना, हर पद पाने मे प्रदेश मे फिसड्डी जिला
– चरम पर भ्रष्टाचार, सब योजनाओं मे कमीशन प्रणाली हावी
शरद कटियार
कभी फर्रुखाबाद का नाम लेते ही विकास की तस्वीर सामने आ जाती थी। दूरदर्शन केंद्र , टेलीफोन एक्सचेंज , हवाई पट्टी , चीनी मिल , कताई मिल यहाँ पहले स्थापित होतीं थी। सरकारी संस्थान यहां चमकाये जाते थे,आज सब बीती बातें हो चुकीं और जिम्मेदार विकास कार्यों की स्वीकृति बता कर कहते कि फर्रुखाबाद आगे बढ़ रहा है। आज हालात ऐसे हैं कि नई परियोजना की घोषणा भी बड़ी उपलब्धि लगती है।
यह वही जनपद है, जिसका क्षेत्रफल 2,181 वर्ग किलोमीटर, आबादी लगभग 18.85 लाख और 1,007 गांव हैं। कभी यहां विकास योजनाएं मांगने के लिए धरना नहीं देना पड़ता था, क्योंकि जनप्रतिनिधियों की आवाज़ लखनऊ और दिल्ली तक सुनी जाती थी। आज पिक्चर बदल ही चुकी
खुर्शीद आलम, विमल प्रसाद तिवारी, महरम सिंह, दयाराम शाक्य, अवधेश चंद्र सिंह, होरी लाल यादव और बाबू पाती राम अहिरवार जैसे नेताओं की राजनीति का आधार सत्ता नहीं, बल्कि जनसेवा थी। यही कारण था कि फर्रुखाबाद को एक के बाद एक बड़ी सौगातें मिलीं। उस दौर में नेताओं की पहचान पोस्टरों और घोषणाओं से नहीं, बल्कि विकास कार्यों से होती थी।
आज तस्वीर बदल चुकी है। जिले में 9,500 से अधिक पंजीकृत औद्योगिक इकाइयों का रिकॉर्ड है और लगभग 1.75 लाख कारीगर जरी-जरदोजी उद्योग से जुड़े रहे हैं। कभी जिले को औद्योगिक पहचान दिलाने वाले ये क्षेत्र आज भी संभावनाओं से भरे हैं, लेकिन बड़े निवेश और नए उद्योगों की कमी साफ दिखाई देती है।
कभी मोहम्मदाबाद की हवाई पट्टी भविष्य के सपनों का प्रतीक थी, आज वह सीमित उपयोग तक सिमट गई है। चीनी मिल और कताई मिल जैसी इकाइयां बीते समय की कहानी बनती चली गईं। दूरदर्शन केंद्र और टेलीफोन एक्सचेंज जैसी पहचान भी समय के साथ इतिहास के पन्नों में सिमट गई।
सबसे बड़ी बात यह है कि आखिर ऐसा क्या बदल गया? क्या फर्रुखाबाद की धरती बदल गई, या फिर उसे नेतृत्व देने वाले लोगों की प्राथमिकताएं?
फर्रुखाबाद पिछड़ा नहीं था, उसे पीछे छोड़ दिया गया। जिन सड़कों पर कभी विकास दौड़ता था, आज वहां गड्ढे हैं। जिन युवाओं को उद्योगों में रोजगार मिलना चाहिए था, वे पलायन को मजबूर हैं। जिन नेताओं ने कभी जिले को पहचान दिलाई, उनकी विरासत को आगे बढ़ाने वाला नेतृत्व आज दिखाई नहीं देता।
जिले की जनता आज भी वही है, मेहनतकश है, ईमानदार है और उम्मीदों से भरी है। बस इंतज़ार उस दिन का है, जब फिर कोई जनप्रतिनिधि कुर्सी नहीं, बल्कि जिले का भविष्य अपनी प्राथमिकता बनाए। क्योंकि इतिहास गवाह है जब नेता ईमानदार होते हैं, तब विकास मांगना नहीं पड़ता, वह खुद फर्रुखाबाद का पता पूछते हुए चला आता है।


