फर्रुखाबाद। इमरजेंसी डे काला दिवस 25 जून 1975 को स्मरण करते हुए लोकतंत्र सेनानी चंद्रपाल वर्मा ने उसे समय की अपनी यादें और अनुभव ताज़ा ताज़ा किये। उन्होंने कहा कि डी ए आर ,मीसा की काली छाया कांग्रेस को 2075 से नहीं छोड़ तक नहीं छोड़ेगी। चाहे कांग्रेस पैदल मार्च निकाले चाहे सारा सरकारी खजाना जनता में बांट देने की बात करें लेकिन वह सत्ता तक पहुंचने में नाकामयाब रहेगी।
श्री वर्मा ने यादें ताजा करते हुए कहा कि उसे समय पर बाजार में निकलने वाले लोगों की पकड़ कर जबरन नसबंदी कर दी जाती थी डर के मारे युवा घरों के बाहर नहीं निकलते थे और बाजारों में सौदा खरीदने के लिए बुजुर्ग लोगों को ही भेजा जाता था। उन्होंने बताया कि जो लोग डी ए आर व मीसा में बंद होते थे उनसे उनसे मिलाई करना टेढ़ी ही हुआ करती थी जिला अधिकारी से आदेश लेकर उनसे मिलाई की जा सकती थी जेल में उन्हें भारी यातनाएं दी जाती थी जो हमारे दिमाग में आज भी ताजा हैं पर मंजर याद करके रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
उन्होंने बताया कि उनकी मां उनके साथी चंद्रशेखर वर्मा की गिरफ्तारी अंगूरी बाद पुलिया से कर ली गई और दिखा दिया गया कि कई लोगों को एकत्र करके हम लोग सरकार विरोधी बयानबाजी कर रहे थे और नारे लगा रहे थे। जब भी ऐसा कुछ नहीं था उन्होंने बताया कि जब वे लोग कारखाने में काम करने के लिए जाते थे तो उनकी मां दरवाजे पर बैठी रखवाली करती रहती थी और जैसे ही पुलिस आने की खबर मिलती थी एक मंदिर से कूद कूद कर भाग जाया करते थे वह मंजर लोकतंत्र को जड़ से समाप्त कर देने वाला मंजर था सरकार निरंकुश हो चुकी थी।
उन्होंने बताया कि इमरजेंसी लागू करने का मुख्य कारण कुर्सी रही क्योंकि उन दिनों वरिष्ठ नेता राजनारायण की याचिका पर पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी का चुनाव अमन ने घोषित कर दिया गया था जिस पर बौखला कर उन्होंने इमरजेंसी लागू कर दी थी और देशवासियों पर बुरी तरीके से कहर ढाया गया परिणाम में हुआ कि अगले चुनाव में कांग्रेस का पत्ता सा हो गया। उन्होंने कहा कि चाहे मुखौटा बदले चाहे नारे बदले लेकिन अब कांग्रेस सत्ता तक नहीं पहुंच सकेगी।
काला दिवस पर भुक्त भोगी चंद्रपाल वर्मा ने साझा किये इमरजेंसी के अनुभव


