लखनऊ। राजधानी में अवैध निर्माणों पर लगाम कसने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए ) ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। अलीगंज अग्निकांड के बाद सामने आई जांच रिपोर्ट और अवैध निर्माणों को लेकर उठे गंभीर सवालों के बीच एलडीए उपाध्यक्ष ने प्रवर्तन विभाग की कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव लागू करने का निर्णय लिया है।
नए आदेश के तहत अब प्रवर्तन विभाग में तैनात सभी अभियंताओं (इंजीनियरों) का कार्यक्षेत्र सीधे LDA के उपाध्यक्ष (वीसी) तय करेंगे। पहले कार्यक्षेत्र के निर्धारण और बदलाव की प्रक्रिया अलग तरीके से होती थी, लेकिन अब इसे पूरी तरह शीर्ष स्तर के नियंत्रण में लाया गया है ताकि किसी भी क्षेत्र में लंबे समय तक एक ही अधिकारी या अभियंता की तैनाती न रहे और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
अलीगंज अग्निकांड की जांच के दौरान यह बात सामने आई कि कई स्थानों पर अवैध निर्माणों के खिलाफ समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जांच में कुछ अभियंताओं और अधिकारियों की कथित मिलीभगत तथा अवैध निर्माणों को संरक्षण देने के आरोप भी सामने आए। इसी के बाद एलडीए ने पूरी व्यवस्था की समीक्षा शुरू की।
सूत्रों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में अवैध निर्माण, नियमों की अनदेखी और विभागीय लापरवाही के मामलों में 18 अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जा चुकी है। इन मामलों में विभागीय जांच, निलंबन और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिशें भी की गई थीं।
एलडीए का मानना है कि कार्यक्षेत्र का निर्धारण सीधे वीसी स्तर से होने पर पारदर्शिता बढ़ेगी, स्थानीय स्तर पर बनने वाले प्रभाव और मिलीभगत की संभावनाएं कम होंगी तथा अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी। साथ ही प्रवर्तन विभाग की जवाबदेही भी पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट होगी।
राजधानी में लगातार सामने आ रहे अवैध निर्माणों, अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और भवन नियमों के उल्लंघन को देखते हुए यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में एलडीए अवैध निर्माणों के खिलाफ और भी सख्त अभियान चलाएगा तथा दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


