मुख्यमंत्री को पत्र भेज कर बड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
एनओसी जारी करने और दमकल की देरी से पहुंचने पर उठाए सवाल
लखनऊ। अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर एवं कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में हुए भीषण अग्निकांड के बाद कार्रवाई की जद में आए फायर विभाग के अधिकारियों के बीच अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। मामले में निलंबित किए गए फायर स्टेशन सेकेंड ऑफिसर (एफएसएसओ) कमलेंद्र सिंह ने वीडियो जारी कर अपनी सफाई पेश की है और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले में चीफ फायर ऑफिसर (सीएफओ) की भूमिका की जांच कराने की मांग की है।
कमलेंद्र सिंह ने अपने निलंबन को एकतरफा कार्रवाई बताते हुए कहा कि छोटे अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि भवनों को फायर एनओसी जारी करने अथवा उसे निरस्त करने का अधिकार सीएफओ स्तर पर होता है, जबकि उनके अधिकार और जिम्मेदारियां सीमित हैं। ऐसे में पूरे मामले की जवाबदेही केवल अधीनस्थ अधिकारियों पर तय करना न्यायोचित नहीं है।
निलंबित अधिकारी ने अपने वीडियो संदेश में यह भी आरोप लगाया कि अग्निकांड की सूचना मिलने के बाद दमकल की गाड़ियों के घटनास्थल पर पहुंचने में देरी हुई थी। उन्होंने कहा कि विभागीय संचालन और रिस्पॉन्स टाइम की जिम्मेदारी भी वरिष्ठ अधिकारियों की होती है, इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कमलेंद्र सिंह ने अपने निलंबन पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा है कि जांच के दायरे में सभी संबंधित अधिकारियों को शामिल किया जाए। उनका कहना है कि यदि एनओसी प्रक्रिया, निरीक्षण व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की समग्र जांच होगी तभी हादसे के वास्तविक कारण सामने आ सकेंगे।


