पेपर लीक विवाद के बाद 5,454 केंद्रों पर हुआ री-एग्जाम
7 लाख कर्मियों की तैनाती
1.38 लाख सीसीटीवी कैमरों से निगरानी
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा रविवार को अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था और कड़े निगरानी तंत्र के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। पेपर लीक विवाद के कारण पूर्व में रद्द की गई परीक्षा के बाद आयोजित इस री-एग्जाम में देश और विदेश के कुल 5,454 परीक्षा केंद्रों पर 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के बाद अब लाखों छात्रों का भविष्य परिणाम और मेरिट सूची पर निर्भर हो गया है।
37 दिन में तैयार हुआ देश का सबसे बड़ा परीक्षा अभियान
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अनुसार इस विशाल परीक्षा आयोजन की पूरी रणनीति मात्र 37 दिनों में तैयार की गई। देश के 551 शहरों में 5,440 परीक्षा केंद्र तथा विदेशों के 14 शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए गए। हिंदी, अंग्रेजी सहित 13 भारतीय भाषाओं में परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा के संचालन में केंद्र और राज्य सरकारों की कई एजेंसियों ने मिलकर काम किया।
अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम, हर केंद्र पर कड़ा पहरा
पेपर लीक प्रकरण के बाद परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके चलते इस बार सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए गए जो पहले कभी देखने को नहीं मिले। प्रत्येक अभ्यर्थी की दो स्तरों पर तलाशी ली गई। बायोमेट्रिक सत्यापन और फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य किया गया। देशभर में 1.38 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई जबकि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दुरुपयोग को रोकने के लिए 53 हजार से अधिक उच्च क्षमता वाले जैमर लगाए गए।
प्रश्नपत्रों और ओएमआर शीटों के सुरक्षित परिवहन के लिए भारतीय वायु सेना और भारतीय डाक विभाग की सेवाएं ली गईं। परीक्षा केंद्रों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों, राज्य पुलिस और साइबर कमांडो की तैनाती भी की गई।
34 कमांड सेंटर से रखी गई नजर
पूरे परीक्षा अभियान की निगरानी के लिए एनटीए मुख्यालय, शिक्षा मंत्रालय और देश के 34 केंद्रीय वित्त पोषित संस्थानों में विशेष कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए। इन केंद्रों से परीक्षा की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को तुरंत रोका जा सके।
दिव्यांग और बीमार छात्रों के लिए विशेष इंतजाम
एनटीए ने 10 हजार से अधिक दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं कीं। इसके अलावा 81 गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे छात्रों के लिए अलग इंतजाम किए गए। इनमें सड़क दुर्घटना से उबर रहे और कैंसर उपचार के दौरान कीमोथेरेपी ले रहे छात्र भी शामिल थे। कई राज्यों में परीक्षार्थियों के लिए मुफ्त परिवहन, पेयजल, छाया और एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई।
7 लाख अधिकारियों और कर्मचारियों ने संभाली जिम्मेदारी
देशभर में परीक्षा को सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस, पर्यवेक्षकों, केंद्र अधीक्षकों और अन्य कर्मचारियों सहित करीब 7 लाख अधिकारियों और कर्मियों की तैनाती की गई। एनटीए ने इस सफल आयोजन में सहयोग के लिए गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, भारतीय वायु सेना, भारतीय डाक विभाग, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र तथा कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का आभार व्यक्त किया।
छात्रों को मिला अतिरिक्त समय
परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार पहली बार 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया गया। इससे छात्रों को दस्तावेजी औपचारिकताएं पूरी करने और प्रश्नपत्र को बेहतर ढंग से पढ़ने का अवसर मिला। दोपहर 2 बजे शुरू हुई परीक्षा शाम 5:15 बजे समाप्त हुई।
प्रधानमंत्री ने दिखाई संवेदनशीलता
नीट परीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता दी। कोलकाता से दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने लगभग 45 मिनट तक हवाई अड्डे पर ही रुकने का निर्णय लिया ताकि उनके काफिले के कारण शहर में यातायात प्रभावित न हो और परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
अब परिणाम और फोरेंसिक जांच पर नजर
एनटीए के अनुसार परीक्षा के बाद ओएमआर शीटों की फोरेंसिक समीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। देशभर के लाखों अभ्यर्थी अब अपने मेडिकल करियर का रास्ता तय करने वाले परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।


