प्रशांत कटियार
फर्रुखाबाद। बीते दिन केन्द्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला-मेला किसानों के बीच चर्चा का विषय बन गया। कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती, किसान सम्मान और अन्नदाताओं के हितों पर लंबी-लंबी बातें हुईं, लेकिन भोजन व्यवस्था ने इन दावों की पोल खोल दी। जिस किसान को कार्यक्रम का केंद्र बताया गया, उसे सबसे साधारण भोजन दिया गया, जबकि वीआईपी और विशेष वर्गों के लिए अलग और बेहतर व्यंजनों की व्यवस्था की गई।मधुवन रिसोर्ट, कमालगंज रोड पर आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ और सरकार की उपलब्धियों का बखान किया गया। लेकिन समापन के बाद भोजन वितरण के समय सामने आई तस्वीरों ने कई सवाल खड़े कर दिए।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार किसानों को दिए गए लंच पैकेट में केवल पूरी, आलू-मटर की सब्जी, सूखी सब्जी और बूंदी का लड्डू रखा गया था। वहीं मंत्री के स्टाफ और विशेष मेहमानों के लिए आकर्षक पैकिंग में मटर पनीर, मिक्स वेज, रायता, पुलाव, रसगुल्ला, अचार, चम्मच और नैपकिन तक की व्यवस्था की गई थी। पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के लिए भी अलग से पनीर, दाल, रोटी, सलाद, रायता और मिठाई परोसी गई।कार्यक्रम में शामिल किसानों के बीच यह व्यवस्था नाराजगी का कारण बनी रही। किसानों का कहना था कि पूरे आयोजन में सबसे कमजोर और साधारण भोजन उसी वर्ग को दिया गया, जिसके नाम पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था। किसानों के बीच यह चर्चा भी रही कि मंच से अन्नदाता को देश की रीढ़ बताया जाता है, लेकिन व्यवहार में उसे सबसे पीछे खड़ा कर दिया जाता है।किसानों ने सवाल उठाया कि जब अन्न पैदा करने वाले हाथों के लिए अलग और कमतर व्यवस्था हो तथा वीआईपी वर्ग के लिए विशेष भोजन की व्यवस्था की जाए, तो किसान सम्मान की बातें केवल भाषणों तक ही सीमित नजर आती हैं। भोजन व्यवस्था में दिखाई दिए इस अंतर ने पूरे आयोजन पर सवालिया निशान लगा दिए और किसानों के सम्मान को लेकर प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी चर्चा छेड़ दी।


