नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत मुफ्त राशन वितरण व्यवस्था में बड़ा सुधार करते हुए देशभर में 2.21 करोड़ अपात्र लाभार्थियों के नाम सूची से हटा दिए हैं। सरकार का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मुफ्त अनाज का लाभ केवल वास्तविक गरीब, जरूरतमंद और पात्र परिवारों तक ही पहुंचे।
केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि विभिन्न राज्यों द्वारा किए गए सत्यापन अभियान में बड़ी संख्या में ऐसे लोग चिन्हित हुए जो योजना के पात्र नहीं थे, लेकिन लंबे समय से मुफ्त राशन का लाभ उठा रहे थे। जांच के दौरान मृत व्यक्तियों के नाम पर जारी राशन कार्ड, आयकरदाता, वाहन मालिक, कंपनियों के निदेशक तथा आर्थिक रूप से सक्षम लोगों के नाम भी लाभार्थी सूची में पाए गए।
सरकार के अनुसार, विभिन्न विभागों के आंकड़ों का मिलान करने पर यह सामने आया कि वर्तमान लाभार्थियों में लगभग 10 प्रतिशत लोग राज्यों के निर्धारित मानकों के अनुसार योजना के पात्र नहीं थे। इसके बाद राजस्थान, मध्य प्रदेश, ओडिशा सहित कई राज्यों ने विशेष अभियान चलाकर अपात्र राशन कार्डों को निरस्त करने की कार्रवाई शुरू की। कई राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अन्य राज्यों में अभी भी सत्यापन जारी है।
जांच के दौरान सबसे गरीब वर्ग के लिए संचालित अंत्योदय अन्न योजना में भी कई अनियमितताएं सामने आईं। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे कई लाभार्थी पाए गए जो अकेले रहने वाले दर्शाए गए थे, जबकि उनकी आयु 18 वर्ष से भी कम थी। इसके अलावा लाखों ऐसे लोग भी मिले जिन्होंने कई महीनों से अपने हिस्से का राशन नहीं उठाया था, फिर भी उनके नाम लाभार्थी सूची में बने हुए थे।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि अपात्र लोगों के नाम हटाने के साथ-साथ वास्तविक पात्र परिवारों को योजना में शामिल करने का अभियान भी चलाया जा रहा है। राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि गरीब और जरूरतमंद परिवार किसी भी स्थिति में योजना के लाभ से वंचित न रहें।
राशन वितरण व्यवस्था में तकनीक के बढ़ते उपयोग को इस सुधार का प्रमुख आधार माना जा रहा है। सरकार के अनुसार, अब 98.5 प्रतिशत राशन वितरण आधार प्रमाणीकरण और ई-पॉस मशीनों के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे फर्जीवाड़े और दोहरे लाभार्थियों की पहचान आसान हुई है। डिजिटल निगरानी के कारण वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी है और सरकारी अनाज की चोरी व दुरुपयोग पर भी अंकुश लगा है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत देश के 81.3 करोड़ लोगों को हर महीने प्रति व्यक्ति पांच किलो मुफ्त अनाज देने का प्रावधान है। हालांकि हालिया सत्यापन अभियान के बाद वर्तमान में लगभग 79.2 करोड़ लोग ही इस योजना का लाभ ले रहे हैं। सरकार का मानना है कि इस व्यापक शुद्धिकरण अभियान से सरकारी संसाधनों की बचत होगी और वास्तविक जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।


