एवियन (फ्रांस)/नई दिल्ली। फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान उस समय दुनिया की निगाहें भारत और अमेरिका पर टिक गईं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देखते ही अपनी सीट से खड़े हो गए और आगे बढ़कर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और कुछ देर तक आपस में बातचीत की। लगभग 16 महीने बाद हुई यह आमने-सामने की मुलाकात भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शिखर सम्मेलन के दौरान सामने आए इस दृश्य ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी। दोनों नेताओं के बीच भले ही संक्षिप्त बातचीत हुई हो, लेकिन इसे बुधवार को होने वाली द्विपक्षीय बैठक की प्रस्तावना माना जा रहा है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में सामने आए विभिन्न मतभेदों के बावजूद यह मुलाकात संबंधों को नई मजबूती देने का संकेत है।
बुधवार को होने वाली द्विपक्षीय बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी साझेदारी, आपूर्ति श्रृंखला, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दे भी वार्ता के केंद्र में रहेंगे।
यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव देखने को मिला था। अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने, भारत-पाकिस्तान से जुड़े बयानों तथा अन्य कूटनीतिक घटनाक्रमों ने संबंधों में कुछ दूरी पैदा की थी। हालांकि दोनों देशों ने लगातार संवाद बनाए रखा और अब जी-7 सम्मेलन के मंच पर दोनों नेताओं की मुलाकात को रिश्तों में नई ऊर्जा भरने वाला कदम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सातवीं बार जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। भारत भले ही जी-7 समूह का सदस्य नहीं है, लेकिन विश्व की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था और वैश्विक मंच पर बढ़ते प्रभाव के कारण उसे विशेष आमंत्रित देश के रूप में लगातार बुलाया जा रहा है। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों से मुलाकात कर वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन में पहुंचने के बाद कहा कि विश्व के प्रमुख नेताओं के साथ संवाद और विचार-विमर्श वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए आवश्यक है। वहीं अमेरिकी प्रशासन की ओर से भी संकेत मिले हैं कि भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा।
अब पूरी दुनिया की नजर बुधवार को होने वाली मोदी-ट्रंप द्विपक्षीय वार्ता पर है। माना जा रहा है कि इस बैठक में लिए जाने वाले निर्णय केवल भारत और अमेरिका के संबंधों को ही नई दिशा नहीं देंगे, बल्कि वैश्विक राजनीति, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग के भविष्य को भी प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में जी-7 सम्मेलन में हुई यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक बन गई है।


