किसान ने उठाए सवाल—क्या रसूख के आगे दब रही न्याय की आवाज? पुलिस को दी तहरीर
पूरनपुर, पीलीभीत।
पूरनपुर तहसील क्षेत्र में जमीन विवाद का मामला अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली और पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर ग्राम पंचायत सचिव की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में त्वरित कार्रवाई होने की चर्चा है, तो दूसरी ओर खुद को पीड़ित बता रहे किसान सर्वेश शुक्ला न्याय की उम्मीद में दर-दर भटकने को मजबूर हैं। मामले ने क्षेत्र में नई बहस छेड़ दी है कि क्या आम किसान और प्रभावशाली लोगों के लिए कानून का रवैया अलग-अलग है।जानकारी के अनुसार, हाल ही में ग्राम पंचायत सचिव महेंद्र सिंह द्वारा हत्या के प्रयास सहित गंभीर आरोप में एक मुकदमा दर्ज कराया गया है। मुकदमेँ में कोतवाली क्षेत्र के गांव पिपरिया दुलई निवासी धीरज, रमाशंकर और सर्वेश शुक्ला को नामजद किया गया है। आरोप है कि जमीनी विवाद की रंजिश के चलते उन पर जानलेवा हमला किया गया। जिसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि संबंधित सचिव पूर्व में पूरनपुर ब्लॉक में तैनात रह चुका है और वर्तमान में जनपद खीरी में अपनी सेवाएं दे रहा है। मुकदमा दर्ज होने के बाद क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई कि आखिर इतनी तेजी से कार्रवाई कैसे हुई।वहीं दूसरी ओर किसान सर्वेश शुक्ला ने पुलिस को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि 14 जून 2026 की सुबह वह अपने खेत पर मौजूद थे, तभी महेंद्र सिंह नामक व्यक्ति ने उन पर हमला कर दिया। किसान का आरोप है कि आरोपी ने लोहे की रॉड से मारपीट की तथा अवैध तमंचा दिखाकर जान से मारने की धमकी दी। हमले में उनके सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें उपचार की आवश्यकता पड़ी।पीड़ित किसान का कहना है कि उसने घटना के संबंध में पुलिस को लिखित तहरीर दी है और अपने साथ हुई मारपीट के संबंध में आवश्यक साक्ष्य भी उपलब्ध कराए हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक उसकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। किसान का आरोप है कि वह कई बार अधिकारियों से न्याय की गुहार लगा चुका है, लेकिन उसे केवल आश्वासन ही मिल रहा है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब एक पक्ष की शिकायत पर तत्काल मुकदमा दर्ज किया जा सकता है, तो दूसरे पक्ष की तहरीर पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के पास चोटों के प्रमाण और लिखित शिकायत मौजूद है, तो उसकी शिकायत की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होना चाहिए।पीड़ित किसान ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि उसकी तहरीर के आधार पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाए, मेडिकल परीक्षण कराया जाए और आरोपित के खिलाफ विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। वहीं पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है। अब सभी की निगाहें पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी और पीड़ित को न्याय मिलेगा या फिर यह मामला प्रभाव और रसूख की बहस में उलझकर रह जाएगा।


