38 C
Lucknow
Monday, June 15, 2026

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “आरटीआई एक्टिविज्म बन गया है नया धंधा”, एक्टिविस्ट की अग्रिम जमानत खारिज

Must read

 

नई दिल्ली। सूचना के अधिकार (RTI) के नाम पर चल रही कथित गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बेहद कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि “आरटीआई एक्टिविज्म अब एक नया धंधा बन गया है।” शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पंजाब में सरकारी सड़क निर्माण कार्य में बाधा डालने और मजदूरों को धमकाने के आरोपी एक स्वयंभू आरटीआई एक्टिविस्ट की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी विकास कार्यों की निगरानी करने का अधिकार किसी तथाकथित एक्टिविस्ट को नहीं है। अदालत ने कहा कि सरकार द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं की देखरेख के लिए संबंधित विभाग और अधिकारी मौजूद हैं, ऐसे में निजी तौर पर हस्तक्षेप कर काम रोकना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

मामला पंजाब के गुरदासपुर जिले के बटाला क्षेत्र का है, जहां आरटीआई एक्टिविस्ट राकेश कुमार बहल और उनके सहयोगी पर सड़क निर्माण कार्य में बाधा डालने, अधिकारियों व मजदूरों को धमकाने तथा सरकारी कामकाज प्रभावित करने के आरोप हैं। पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं भी शामिल हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया कि उन्होंने सड़क निर्माण में कथित भ्रष्टाचार का खुलासा किया था और इसी कारण उन्हें फंसाया गया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर हैं तथा सरकारी कार्य में बाधा डालने में आरोपी की भूमिका स्पष्ट दिखाई देती है।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। न्यायालय के इस रुख को उन लोगों के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है जो सामाजिक सक्रियता और आरटीआई के नाम पर सरकारी कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप करते हैं।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article