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Friday, June 12, 2026

रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में एकजुट हुए अधिवक्ता, स्टांप विक्रेता और दस्तावेज लेखक

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मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा, आदेश वापस न होने पर आंदोलन की चेतावनी

फर्रुखाबाद। प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के खिलाफ तहसील सदर में अधिवक्ताओं, स्टांप विक्रेताओं और दस्तावेज लेखकों ने मोर्चा खोल दिया है। तहसील सदर बार एसोसिएशन, स्टांप विक्रेता संगठन तथा दस्तावेज लेखक संघ के संयुक्त नेतृत्व में मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी (सदर) को सौंपा गया। ज्ञापन में ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी गई कि यदि सरकार ने इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

ज्ञापन में कहा गया कि ई-रजिस्ट्री प्रणाली लागू होने से वर्षों से तहसीलों में कार्य कर रहे अधिवक्ताओं, स्टांप विक्रेताओं और दस्तावेज लेखकों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। हजारों परिवारों की रोजी-रोटी सीधे तौर पर प्रभावित होगी और पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के अवसर समाप्त होने लगेंगे।

विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि जिन निजी कंपनियों अथवा एजेंसियों को रजिस्ट्री प्रक्रिया का कार्य सौंपे जाने की चर्चा है, उनके कर्मचारियों के पास विधिक जानकारी और भूमि संबंधी कानूनों की पर्याप्त समझ नहीं होगी। ऐसे में दस्तावेजों में त्रुटियां बढ़ने की आशंका है, जिससे भविष्य में संपत्ति विवाद और मुकदमों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में अधिवक्ता और अनुभवी दस्तावेज लेखक कानूनी पहलुओं की जांच-पड़ताल कर दस्तावेज तैयार करते हैं, जिससे गलतियों की संभावना कम रहती है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि सरकार का यह निर्णय केवल पेशेवर वर्ग को ही प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि आम जनता को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। संगठनों ने दावा किया कि ई-रजिस्ट्री व्यवस्था लागू होने से ग्रामीण और कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार को आगाह करते हुए कहा कि यदि इस आदेश को शीघ्र वापस नहीं लिया गया तो अधिवक्ता, स्टांप विक्रेता और दस्तावेज लेखक प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन चलाने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले का राजनीतिक प्रभाव भी पड़ सकता है और आगामी विधानसभा चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है।

ज्ञापन पर तहसील सदर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अतर सिंह कटियार, सचिव अतुल कुमार मिश्रा, अधिवक्ता मुन्ना यादव, अजय प्रताप सिंह, नंदकिशोर दुबे, अशोक कुमार सक्सेना, संजीव भारद्वाज, मनीष सक्सेना, दिनेश कुमार बाथम सहित दस्तावेज लेखक संघ और स्टांप विक्रेता संघ के अनेक पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ता और अन्य संबंधित संगठन के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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