बांदा। नरैनी थाना क्षेत्र स्थित पुकारी गांव की मौरंग खदान में एक सुपरवाइजर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने खनन कारोबार और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजनों ने इसे दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए पोकलैंड मशीन से दबाकर हत्या किए जाने का आरोप लगाया है।
जानकारी के अनुसार संबंधित मौरंग खदान मुरली कंस्ट्रक्शन के नाम से आवंटित बताई जा रही है, जिसका संचालन वैभव सिंह से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि खदान की पर्यावरणीय स्वीकृति (EC) न होने के बावजूद रात के अंधेरे में खनन कार्य कराया जा रहा था। इसी दौरान खदान में कार्यरत सुपरवाइजर की मौत हो गई।
परिजनों का आरोप है कि यह कोई सामान्य हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या का मामला है। उनका कहना है कि मृतक को पोकलैंड मशीन से दबाया गया और बाद में इसे दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है और ग्रामीणों में भी आक्रोश देखा जा रहा है।
मामले को और गंभीर बनाता है वह तथ्य, जिसमें घटनास्थल पर कथित रूप से 1265 घनमीटर अवैध खनन मिलने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि खदान को पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त नहीं थी तो आखिर वहां खनन कैसे हो रहा था और निकाली गई मौरंग का परिवहन किस आधार पर किया जा रहा था?
घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय स्तर पर नरैनी एसडीएम अंजनी यादव, पुलिस प्रशासन और खनन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं तेज हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि लंबे समय से अवैध खनन की शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
वहीं खनन अधिकारी राज रंजन पर भी मामले को दबाने के प्रयासों के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


