पटना। सरकारी कार्यालयों में देर से पहुंचने वाले कर्मचारियों के लिए अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने सरकारी दफ्तरों में अनुशासन और कार्यसंस्कृति सुधारने के उद्देश्य से सख्त कदम उठाया है। नए आदेश के तहत समय पर कार्यालय नहीं पहुंचने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और लगातार देरी होने पर वेतन कटौती तक की नौबत आ सकती है।
सरकार ने सभी विभागों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। अब कर्मचारियों की उपस्थिति डिजिटल माध्यम से दर्ज होगी, जिससे देर से आने और समय से पहले कार्यालय छोड़ने की निगरानी की जा सकेगी। अधिकारियों को भी यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि कार्यालय समय का कड़ाई से पालन हो।
नए नियमों के अनुसार मार्च से अक्टूबर तक सरकारी कार्यालयों का समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित किया गया है। वहीं नवंबर से फरवरी तक कार्यालय सुबह 10:30 बजे खुलेंगे और शाम 5 बजे तक संचालित होंगे। सरकार का मानना है कि निर्धारित समय का पालन होने से आम जनता को बेहतर और समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक लंबे समय से सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों की लेटलतीफी और अनुपस्थिति को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। कई जिलों में निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी निर्धारित समय के बाद कार्यालय पहुंचते पाए गए थे। इसी के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए जवाबदेही बढ़ाने का निर्णय लिया है।
सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि कर्मचारी संगठनों की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी नजर बनी हुई है। फिलहाल स्पष्ट संदेश है कि अब सरकारी दफ्तरों में समय की अनदेखी कर्मचारियों पर भारी पड़ सकती है।


