– विभागाध्यक्ष हटे, एफआईआर की तैयारी
लखनऊ। प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शामिल (केजीएमयू) में करोड़ों रुपये के कथित दवा घोटाले का खुलासा होने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की आंतरिक जांच में गंभीर वित्तीय और प्रक्रियागत अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अपुल गोयल को पद से हटा दिया गया है। इसके साथ ही तीन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है तथा एक नियमित फार्मासिस्ट को निलंबित कर दिया गया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गरीब और असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों को राहत देने के उद्देश्य से संचालित असाध्य योजना के तहत दवाओं की खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि कई मरीजों को रिकॉर्ड में बार-बार भर्ती दर्शाकर कैंसर, प्रोटीन सप्लीमेंट और आयरन जैसी महंगी दवाओं की खरीद दिखाई गई। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग और फर्जी खरीद के जरिए वित्तीय लाभ लेने की आशंका गहरा गई है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि मरीजों को बार-बार भर्ती दिखाया गया तो अस्पताल की निगरानी प्रणाली, दवा वितरण व्यवस्था और लेखा परीक्षण तंत्र इतने लंबे समय तक इसे पकड़ने में कैसे विफल रहे। यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों की भूमिका तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि पूरे प्रशासनिक नियंत्रण और जवाबदेही प्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार जांच में कई ऐसे दस्तावेज सामने आए हैं जिनमें मरीजों के नाम पर दवा खरीद का रिकॉर्ड तो मौजूद है, लेकिन वास्तविक उपयोग और वितरण को लेकर गंभीर विसंगतियां पाई गई हैं। यदि आरोप पूरी तरह सही साबित होते हैं तो यह घोटाला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि उन गरीब मरीजों के अधिकारों पर भी सीधा प्रहार है, जिनके लिए यह योजना संचालित की गई थी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित एजेंसी से घोटाले की राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू करने के संकेत दिए हैं। साथ ही बर्खास्त किए गए तीन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों और निलंबित फार्मासिस्ट के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को तहरीर भी सौंप दी गई है।


