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Monday, June 1, 2026

बिजली बिल पर बढ़ा बवाल: 10% अतिरिक्त वसूली के खिलाफ नियामक आयोग पहुंचे उपभोक्ता, आज दाखिल होगा लोक महत्व प्रस्ताव

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जून माह से बिजली उपभोक्ताओं पर डाले गए अतिरिक्त आर्थिक बोझ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बिजली बिल में करीब 10 प्रतिशत तक की अतिरिक्त वसूली के मामले ने अब उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग का दरवाजा खटखटा दिया है। उपभोक्ता परिषद ने इस मुद्दे को जनहित से जुड़ा बताते हुए आज आयोग में लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल करने का निर्णय लिया है।

मामले की जड़ में यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल ) द्वारा लागू किया गया फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) है। इसके तहत जून के बिजली बिलों में अतिरिक्त राशि वसूलने के आदेश जारी किए गए हैं। बिजली उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले से महंगाई की मार झेल रही जनता पर यह नया बोझ किसी झटके से कम नहीं है।
उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि फ्यूल सरचार्ज की गणना में कई गंभीर विसंगतियां हैं और उपभोक्ताओं से वास्तविक लागत से अधिक वसूली की जा रही है। परिषद का कहना है कि जब तक पूरे गणित और प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच नहीं हो जाती, तब तक अतिरिक्त वसूली पर रोक लगाई जानी चाहिए।
सूत्रों के अनुसार परिषद आयोग के समक्ष यह सवाल भी उठाएगी कि बिजली कंपनियों की अक्षमताओं और वित्तीय प्रबंधन की खामियों का बोझ आखिर आम उपभोक्ता क्यों उठाए? यदि बिजली खरीद और उत्पादन लागत में वृद्धि हुई भी है तो उसकी पूरी पारदर्शी जानकारी जनता के सामने रखी जानी चाहिए।
उधर ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि फ्यूल सरचार्ज व्यवस्था बिजली वितरण कंपनियों को लागत की भरपाई का अधिकार देती है, लेकिन इसकी गणना और लागू करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। इसी बिंदु को लेकर अब विवाद गहराता दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर सक्रिय हो गए हैं। विपक्ष पहले ही बिजली बिलों में बढ़ोतरी को जनता पर आर्थिक हमला बता चुका है। ऐसे में आयोग में दाखिल होने वाला यह प्रस्ताव आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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