26 C
Lucknow
Sunday, May 31, 2026

मिर्जापुर में दो फॉर्च्यूनर से करोड़ों रुपये बरामद, आयकर विभाग ने दो व्यापारियों को भेजा नोटिस

Must read

मिर्जापुर: यूपी के मिर्जापुर (Mirzapur) जिले में दो फॉर्च्यूनर (two Fortuners) गाड़ियों से करोड़ों रुपये नकदी बरामद होने के बाद मामला अब सिर्फ कैश रिकवरी का नहीं, बल्कि बड़े नेटवर्क, मुखबिरी और जांच की गंभीरता का सवाल बन गया है। इस मामले में आयकर विभाग ने दो व्यापारियों को नोटिस जारी करते हुए पैसों का हिसाब मांगा है। उन्हें चार दिन के भीतर जवाब देना होगा।

चील्ह थाना क्षेत्र में चेकिंग के दौरान पुलिस ने दो फॉर्च्यूनर गाड़ियों को रोका। शुरुआती जानकारी में नकदी करीब 4 करोड़ रुपये बताई गई। नोटों की गिनती के लिए बैंक से मशीन मंगानी पड़ी और कई घंटे तक गिनती चली। लेकिन बाद में पुलिस की ओर से रकम करीब 1.90 करोड़ रुपये बताई जाने लगी। यही सबसे बड़ा सवाल है, पहले 4 करोड़ की चर्चा और बाद में 1.90 करोड़ का आंकड़ा, आखिर बीच में यह अंतर क्यों आया?

सूत्रों के मुताबिक एक गाड़ी ट्रांसपोर्ट/गिट्टी-बालू कारोबार से जुड़ी फर्म के नाम बताई जा रही है, जबकि दूसरी गाड़ी भी खनन, गिट्टी, बालू और पेट्रोल पंप कारोबार से जुड़े लोगों से संबंधित बताई जा रही है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी नकदी आखिर किसकी थी? यह पैसा कहां से आया और किसे दिया जाना था?

बताया जा रहा है कि वाहन मिर्जापुर की तरफ आ रहे थे। पुलिस को पहले से सूचना मिली और चील्ह चौराहे पर गाड़ियों को रोका गया। यानी यह सामान्य चेकिंग में अचानक पकड़ी गई रकम थी या किसी ने सटीक मुखबिरी की थी। यह भी जांच का बड़ा बिंदु है।

अभिनीत बंसल को मिर्जापुर का बड़ा कारोबारी बताया जा रहा है, जिनका गिट्टी सप्लाई, पेट्रोल पंप, क्रशर प्लांट और ट्रांसपोर्ट से जुड़ा कारोबार बताया जाता है। भारत सिंह मध्य प्रदेश के सीधी से जुड़े बताए जा रहे हैं। अब जांच इस बात की होनी चाहिए कि दोनों के बीच कारोबारी संबंध क्या हैं और नकदी का वास्तविक स्रोत क्या है।

सबसे बड़ा सवाल आयकर विभाग की कार्रवाई पर भी है। करोड़ों की नकदी मिलने के बाद सिर्फ नोटिस जारी करना पर्याप्त है या तत्काल व्यापक छापेमारी होनी चाहिए थी? इतनी बड़ी रकम बरामद होने के बाद अगर तत्काल ठिकानों, फर्मों, पेट्रोल पंपों, क्रशर प्लांटों, बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच नहीं हुई, तो क्या संभावित सबूत हटाने का समय मिल गया?

यह मामला खनन कारोबार, नकद लेनदेन, टैक्स चोरी और संभावित हवाला नेटवर्क तक जा सकता है। इसलिए सवाल उठ रहा है कि क्या केवल आयकर विभाग की नोटिस कार्रवाई काफी है या अब ED और अन्य एजेंसियों की एंट्री भी होनी चाहिए?

फिलहाल नकदी, गाड़ियां और संबंधित लोग जांच के दायरे में हैं। लेकिन जनता का सवाल साफ है क्या यह सिर्फ व्यापारी का पैसा है या इसके पीछे खनन, टैक्स और काले धन का बड़ा खेल छिपा है?

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article