लखनऊ। उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में इन दिनों तबादला आदेशों को रद्द करवाने को लेकर अंदरखाने खूब चर्चाएं हो रही हैं। सूत्रों के मुताबिक हाल ही में एक दर्जन से अधिक पीसीएस अधिकारियों ने अपने तबादला आदेश प्रमुख सचिव नियुक्ति स्तर से निरस्त करवाने में सफलता हासिल की है। इसके बाद सचिवालय और प्रशासनिक गलियारों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।बताया जा रहा है कि जिन अधिकारियों के तबादले हुए थे, उन्होंने विभिन्न स्तरों पर सक्रियता दिखाते हुए अपने आदेश रुकवा लिए। अब ब्यूरोक्रेसी में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। खासकर आईएएस अधिकारियों के बीच भी यह बात तंज और हैरानी के साथ कही जा रही है कि आखिर पीसीएस अधिकारी ऐसा “जुगाड़” कहां से लेकर आते हैं, जिससे तबादला आदेश तक बदल जाते हैं।
प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि प्रमुख सचिव नियुक्ति एम देवराज अपनी सख्त कार्यशैली और ईमानदार छवि के लिए जाने जाते हैं। माना जाता है कि वे सामान्य तौर पर किसी प्रकार की सिफारिश या दबाव को तवज्जो नहीं देते। इसके बावजूद इतने बड़े स्तर पर तबादला आदेशों में बदलाव ने अफसरशाही के भीतर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।सूत्रों का कहना है कि कुछ अधिकारियों ने व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों का हवाला दिया, जबकि कुछ ने प्रशासनिक जरूरतों को आधार बनाकर आदेश निरस्त कराने की कोशिश की। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस पूरे मामले पर कोई बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सत्ता और प्रशासन के गलियारों में यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।


