वाराणसी। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सनातन धर्म, संस्कृति और आगामी चुनावों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी सनातन परंपरा और आध्यात्मिक विरासत से है, इसलिए देश को अमेरिका और इंग्लैंड की सांस्कृतिक सोच की दिशा में नहीं जाने दिया जाएगा।
वाराणसी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि वह लगातार विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और सनातन धर्म में आस्था रखने वाले लोगों से संवाद स्थापित कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सनातन समाज को जागरूक करना और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए संगठित करना है।
उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव केवल सरकार चुनने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि देश की वैचारिक और सांस्कृतिक दिशा तय करने वाले भी हैं। इसी कारण वह लोगों से अपील कर रहे हैं कि सनातन परंपरा, धर्म और संस्कृति के पक्ष में खड़े उम्मीदवारों का समर्थन करें।
शंकराचार्य ने कहा कि भारत की आत्मा उसकी सनातन संस्कृति में बसती है और यदि समाज अपनी जड़ों से कट गया तो देश की मूल पहचान कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि धर्म और संस्कृति केवल पूजा-पद्धति तक सीमित विषय नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र की सामाजिक संरचना और जीवन मूल्यों का आधार हैं।
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। आगामी चुनावों के मद्देनजर सनातन, संस्कृति और धार्मिक पहचान का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आता दिखाई दे रहा है।


