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Thursday, May 28, 2026

मानक विहीन कृष्णा हॉस्पिटल, “मां की कोख को बना दिया काली कमाई का अड्डा”

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– गरीब गर्भवती महिलाओं को डराकर ऑपरेशन कराने और मोटी रकम वसूलने का खुला खेल

फर्रुखाबाद। मसेनी चौराहे के पास संचालित कृष्णा हॉस्पिटल इन दिनों चर्चा का केंद्र है। आम जनमानस मे अस्पताल पर लगे आरोपों ने न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि निजी अस्पतालों में चल रहे कथित “डर और दलाली के खेल” को भी उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों का आरोप है कि अस्पताल में गरीब और मजबूर गर्भवती महिलाओं की जिंदगी को कमाई का जरिया बना दिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग के एक जानकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अस्पताल में सामान्य डिलीवरी के मामलों को भी जबरन ऑपरेशन में बदला जाता है। आरोप है कि जैसे ही गर्भवती महिला अस्पताल पहुंचती है, वहां का स्टाफ पहले से तय “स्क्रिप्ट” के अनुसार माहौल बनाना शुरू कर देता है। महिला को अंदर ले जाते ही अफरा-तफरी और भागदौड़ का माहौल खड़ा किया जाता है ताकि बाहर खड़े परिजनों को लगे कि मरीज की हालत बेहद गंभीर है।

इसके बाद शुरू होता है डर का खेल। परिजनों से कहा जाता है कि “बच्चा तिरछा है”, “बच्चे की धड़कन कम हो रही है”, “वजन ज्यादा है”, “ऑपरेशन नहीं हुआ तो मां और बच्चे दोनों की जान जा सकती है।” आरोप है कि कई मामलों में गर्भवती महिलाओं को ऐसे इंजेक्शन लगाए जाते हैं जिससे उन्हें असहनीय दर्द होने लगे और परिजन घबराकर तुरंत ऑपरेशन के लिए तैयार हो जाएं।

जैसे ही परिजन सहमति देते हैं, वैसे ही अस्पताल में मोटी रकम की मांग शुरू हो जाती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गरीब परिवार इलाज के नाम पर कर्ज लेने, गहने गिरवी रखने और जमीन बेचने तक को मजबूर हो जाते हैं। लेकिन अस्पताल प्रबंधन पर इसका कोई असर दिखाई नहीं देता।

अस्पताल पर नियम विरुद्ध तरीके से गर्भपात कराने के भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अस्पताल में न पर्याप्त योग्य डॉक्टर मौजूद रहते हैं और न ही जरूरी स्वास्थ्य संसाधन। अस्पताल परिसर में गंदगी और अव्यवस्थाओं का अंबार लगा रहता है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि अस्पताल के बाहर बड़े-बड़े विशेषज्ञ डॉक्टरों के नाम और डिग्रियां लिखी गई हैं, लेकिन हकीकत में वे डॉक्टर मौके पर दिखाई नहीं देते। आरोप है कि मरीजों का इलाज अधिकतर अनुभवहीन और झोलाछाप लोगों के भरोसे किया जा रहा है, जिससे मरीजों की जिंदगी लगातार खतरे में पड़ रही है।
अस्पताल संचालक सुरेंद्र कुशवाहा पर आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने कहा कि “पैसों की हवस ने इंसानियत को निगल लिया है।” लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि अस्पताल की तत्काल उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो अस्पताल को सील कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।इस मामले मे मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अवनीन्द्र कुमार नें कहा कि मामले की गहनता से जाँच होगी, मामला सही निकला तो कड़ी कार्यवाही होगी।

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