– डीएम की सख्ती के बाद सिटी मजिस्ट्रेट पारुल तरार ने तलब कीं फाइलें
– जसमई और बघार क्षेत्र प्रशासन के रडार पर, अभिलेखों की होगी गहन जांच
फर्रुखाबाद। जनपद में अवैध प्लाटिंग और भू-माफियाओं के खिलाफ अब बड़ा प्रशासनिक अभियान शुरू होने जा रहा है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की सख्ती के बाद नगर मजिस्ट्रेट पारुल तरार ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में चल रही संदिग्ध प्लाटिंगों की पत्रावलियां तलब कर ली हैं। प्रशासन अब एक-एक अभिलेख खंगालकर यह पता लगाएगा कि आखिर किन नियमों और किन अधिकारियों की शह पर अवैध कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक शहर से सटे जसमई और बघार क्षेत्र प्रशासन की विशेष निगरानी में आ गए हैं। इन इलाकों में कृषि भूमि को बिना मानचित्र स्वीकृति और बिना वैधानिक अनुमति के प्लाटिंग में तब्दील किए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। शिकायतों के बाद प्रशासन हरकत में आया और अब बड़े स्तर पर जांच की तैयारी शुरू हो गई है।
बताया जा रहा है कि कई स्थानों पर बिना सड़क, नाली, जल निकासी और अन्य बुनियादी मानकों के धड़ल्ले से प्लॉट बेचे जा रहे हैं। आरोप यह भी हैं कि कुछ भूमाफिया प्रशासनिक नियमों को ताक पर रखकर किसानों और आम लोगों को झूठे सपने दिखाकर करोड़ों का खेल कर रहे हैं। अब नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय से संबंधित विभागों को अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो जांच में यदि अनियमितता पाई गई तो अवैध प्लाटिंग पर बुलडोजर कार्रवाई से भी इनकार नहीं किया जा रहा। साथ ही ऐसे मामलों में राजस्व, विकास प्राधिकरण और स्थानीय निकायों की भूमिका की भी पड़ताल होगी।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर पहले ही साफ संकेत दे चुके हैं कि अवैध कब्जे, भू-माफियागिरी और नियम विरुद्ध निर्माण किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। यही वजह है कि अब नगर मजिस्ट्रेट पारुल तरार की सक्रियता से भूमाफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में जिले में अवैध प्लाटिंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है। फिलहाल जसमई और बघार क्षेत्र के कई चर्चित प्लॉटिंग कारोबारियों की सांसें अटकी हुई हैं।


