नई दिल्ली। देश में बढ़ती घुसपैठ, सीमावर्ती क्षेत्रों में बदलते जनसांख्यिकीय हालात और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को घोषणा करते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने “हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज” का गठन कर दिया है। इस कमेटी की अध्यक्षता जस्टिस नाओलेकर करेंगे। सरकार का कहना है कि यह समिति देश में हो रहे अप्राकृतिक जनसंख्या बदलाव, अवैध घुसपैठ और उससे पैदा हो रही सामाजिक, राजनीतिक व सुरक्षा चुनौतियों का व्यापक अध्ययन करेगी।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के लिए अनियंत्रित घुसपैठ और तेजी से बदलता जनसांख्यिकीय संतुलन भविष्य में गंभीर संकट खड़ा कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई सीमावर्ती इलाकों और संवेदनशील जिलों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जनसंख्या संरचना में असामान्य परिवर्तन देखने को मिले हैं, जिनका प्रभाव स्थानीय संसाधनों, रोजगार, कानून-व्यवस्था और सामाजिक संतुलन पर पड़ रहा है।
केंद्र सरकार के अनुसार यह कमेटी देशभर के विभिन्न राज्यों, खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। समिति यह भी जांच करेगी कि किन इलाकों में अवैध घुसपैठ के कारण जनसंख्या अनुपात में बदलाव आया है और उसका राष्ट्रीय सुरक्षा पर क्या असर पड़ा है। इसके साथ ही कमेटी नागरिकता, सीमा प्रबंधन, पहचान सत्यापन और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कानूनों की समीक्षा कर केंद्र सरकार को सुझाव देगी।
गृह मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 15 अगस्त 2025 को लालकिले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए इस कमेटी के गठन की घोषणा की थी। अब इसे औपचारिक रूप से लागू कर दिया गया है। सरकार का दावा है कि यह समिति केवल आंकड़ों का अध्ययन नहीं करेगी, बल्कि भविष्य में देश की जनसंख्या नीति और सुरक्षा रणनीति तय करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।
सूत्रों के अनुसार कमेटी गृह मंत्रालय, जनगणना विभाग, खुफिया एजेंसियों और विभिन्न राज्यों से डाटा जुटाकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार सीमा सुरक्षा, अवैध नागरिकों की पहचान, दस्तावेज सत्यापन और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर जैसे मुद्दों पर आगे की रणनीति बना सकती है।
राजनीतिक हलकों में इस फैसले को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक संतुलन बचाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार की नीयत और संभावित राजनीतिक असर को लेकर सवाल उठा रहा है। आने वाले समय में यह कमेटी देश की राजनीति और नीति निर्धारण दोनों पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।


