– महिला मरीज की मौत पर फूटा गुस्सा, अस्पताल में घंटों हंगामा
– नगर मजिस्ट्रेट ने एसएस हॉस्पिटल किया सील
– बोलीं नहीं मिले अस्पताल कर मानक
– संचालक अनुज राजपूत समेत अन्य पर कार्रवाई की तैयारी
फर्रुखाबाद। जिले में मानक विहीन निजी अस्पतालों कि शनिवार को प्रशासनिक अमले के सामने पोल खुल गई, मौके पर पहुंची नगर मजिस्ट्रेट पारुल तरल को मसेंनी स्थित एस एस हॉस्पिटल पूरी तरह मानक विहीन मिला यह वही अस्पताल है जिसे महीनों से अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ रंजन गौतम सही करार देते आए ऐसे ही तमाम अस्पताल और भी हैं जिनकी वकालत तीन दिन पूर्व अपने राग दरबारी में सदर विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी 22 अस्पताल संचालकों के बीच कर रहे थे।
गलत इलाज कर ऑपरेशन से पूर्व ही महिला को मौत के हवाले कर देने के मामले में शनिवार को लकूला मसेनी रोड स्थित भारी बवाल खड़ा हो गया।पीड़ित परिजनों ने चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में जमकर हंगामा किया।
मामले की जानकारी पाकर पहुंचे मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवनींद्र कुमार को अस्पताल संचालक द्वारा बुलाए गए अधिवक्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा और उन्हें अस्पताल संचालक और उसके साथियों ने जान से मारने तक का इंतजाम करते हुए घेर लिया, उन्हें भाग कर खुद को सुरक्षित करना पड़ा उनकी जानकारी पर मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष कादरी गेट एवं भारी पुलिस बल नें स्थिति को नियंत्रण में किया सीएमओ को पुलिस सुरक्षा में मौके से निकलना पड़ा।
बता दें कि थाना राजेपुर क्षेत्र निवासी श्वेता उर्फ वर्षा पत्नी अश्वनी को पित्ताशय में पथरी की शिकायत के चलते एसएस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल संचालक अनुज राजपूत की देखरेख में महिला का इलाज चल रहा था। शनिवार को चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार मौर्य द्वारा ऑपरेशन किया जाना था। आरोप है कि जैसे ही महिला को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया, उसकी हालत बिगड़ गई और कुछ ही देर में मौत हो गई।
मौत की सूचना मिलते ही अस्पताल में चीख-पुकार मच गई। मृतका के ससुर सत्यपाल समेत अन्य परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही और गलत उपचार का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। गाना की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई तो मौके पर पहुंचे सीएमओ में स्थिति का जायजा लिया,उन्होंने अस्पताल के दस्तावेज, व्यवस्थाएं और संचालन संबंधी स्थितियों का निरीक्षण किया। प्रथम दृष्टया अनियमितताएं मिलने पर अस्पताल को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। सीएमओ की करवाई की जानकारी अस्पताल संचालक को जैसे ही हुई तो उसने अपने समर्थन में कई वकील बुला लिए और वह सीएमओ से अभद्रता करने लगा और उन्हें अपनी जान बचाकर मौके से भागना पड़ा मामले की जानकारी जिला प्रशासन को दी गई, तो नगर मजिस्ट्रेट पारुल तरार मौके पर पहुंचीं और प्रशासनिक कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए अस्पताल को सील करा दिया।
घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग अब अस्पताल के पंजीकरण, चिकित्सकीय मानकों और ऑपरेशन प्रक्रिया की जांच में जुट गया है। सूत्रों के अनुसार अस्पताल संचालक अनुज राजपूत और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।


