– लेखपाल–प्रॉपर्टी डीलरों के गठजोड़ से सरकारी भूमि की खुलेआम कब्ज़ा कर बिक्री!
फर्रुखाबाद। राजस्व कर्मियों और जमीन माफिया के शहर में चल रहे खुले खेल के बीच थाना कादरीगेट क्षेत्रके लकुला में डॉ भीमराव अंबेडकर पुस्तकालय की सरकारी जमीन पर कब्जे के बाद एक दूसरे लेखपाल की सरपरस्ती में सरकारी बंजर जमीन को सरेबाजार उस पर आलीशान विला बना कर बेचे जा रहे हैं और जिम्मेदार आंखें मूंद सरकार के जीरो टॉलरेंस का मजाक बनवा रहे हैं।
तहसील सदर क्षेत्र के नेकपुर कलाँ में सरकारी बंजर भूमि पर अवैध प्लॉटिंग के जरिये सरकारी बंजर भूमि गाटा संख्या 474 व 475, जो राजस्व अभिलेखों में बंजर भूमि के नाम दर्ज है, उसे भूमाफियाओं ने अधिकारियों की मिलीभगत से प्लॉटों में तब्दील कर भोले-भाले लोगों को बेच डाला। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है और राजस्व विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार शिवाजी कॉलोनी के पीछे स्थित इस बंजर जमीन पर सदर तहसील के लेखपाल संजीव दुबे ने प्रॉपर्टी डीलर चमन श्रीवास्तव के साथ मिलकर सरकारी भूमि को निजी संपत्ति बताकर छोटे-छोटे प्लॉट काटे गए और भोले भाले लोगों को मोटी रकम लेकर बेचे जा रहे हैं । कई खरीदारों को अब पता चला है कि जिस जमीन को उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से खरीदा, वह वास्तव में सरकारी बंजर भूमि है।
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इस इलाके में अवैध प्लॉटिंग का खेल चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहे। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब राजस्व रिकॉर्ड में जमीन स्पष्ट रूप से बंजर दर्ज है, तो आखिर किस आधार पर वहां खरीद-फरोख्त और प्लॉटिंग कराई गई। लोगों का आरोप है कि बिना प्रशासनिक संरक्षण के इतनी बड़ी स्तर पर सरकारी जमीन की बिक्री संभव नहीं है।मामले को लेकर क्षेत्र में भारी आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी और उच्चाधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग की है। साथ ही आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और अवैध प्लॉट खरीदने वाले लोगों की रकम वापस दिलाने की भी मांग उठ रही है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन भूमाफियाओं और कथित भ्रष्ट तंत्र पर कार्रवाई करता है या मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।


