– बार के पूर्व महासचिव नरेश यादव एक वर्ष के लिए निष्कासित
– बोले यादव कार्यकारिणी नहीं विधिमान्य
– सभी अधिकार एल्डर्स कमेटी में निहित
फर्रुखाबाद। फतेहगढ़ बार एसोसिएशन की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। बार एसोसिएशन ने अनुशासनहीनता और संस्था की छवि धूमिल करने के आरोप में पूर्व महासचिव अधिवक्ता नरेश सिंह यादव को एक वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद अधिवक्ता समुदाय में तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वहीं निष्कासित हुए पूर्व महासचिव श्री यादव ने आरोप लगाया की कार्यकारिणी विद्यमान नहीं रह गई मॉडल का इलाज के पारा 18 के अनुसार कार्यकाल खत्म हो जाने के बाद सभी अधिकार एल्डर कमेटी में निहित हो जाते हैं वह निष्कासन को सिरे से खारिज करते हैं।
बार एसोसिएशन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि पूर्व महासचिव लगातार सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से संस्था के खिलाफ भ्रामक प्रचार कर रहे थे। आरोप है कि उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को लेकर अधिवक्ताओं में असंतोष फैलाने का प्रयास किया और बार पदाधिकारियों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए। उधर अधिवक्ता नरेश यादव ने कहा कि उन्होंने बार के चुनाव की मांग 18 मार्च 2026 को की थी क्योंकि 28 फरवरी 2026 को कमेटी का कार्यकाल खत्म हो चुका है। इनका शपथ ग्रहण 7 मार्च 2026 को हुआ था, इनके द्वारा लगातार पद का दुरुपयोग किया जा रहा है उन्होंने वादकारियों और अधिवक्ताओं की सुविधा के लिए जून में कचहरी सुबह 7 से दोपहर 1:00 बजे तक रहने की मांग की थी और उच्च न्यायालय को भी लिखा था 35 जिलों में यह परंपरा कई वर्षों से संचालित है लेकिन वर्तमान कमेटी ने विरोध करके कचहरी का समय सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक का ही रखा। साथी उन्होंने आरोप लगाए की इस कमेटी के कार्यकाल के दौरान कचहरी में भ्रष्टाचार पूर्व की भांति चरम पर हो गया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के अपराधिक और माफिया प्रवृत्ति के चिट्ठे शासन प्रशासन के सामने खोलेंगे पदों की आड़ में किस तरीके से कब्जे और धनार्जन हो रहा है यह भी बताएंगे।
एसोसिएशन ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव प्रक्रिया और एल्डर्स कमेटी से जुड़े मामलों को जानबूझकर विवादित बनाया गया। संस्था का आरोप है कि बिना किसी आधिकारिक मंच पर आपत्ति दर्ज कराए सीधे सोशल मीडिया पर बयानबाजी कर बार की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई।
बार पदाधिकारियों का कहना है कि कई बार समझाने के बावजूद गतिविधियों में सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद कार्यकारिणी ने कड़ा कदम उठाते हुए एक वर्ष के निष्कासन का निर्णय लिया। आदेश के अनुसार निष्कासन अवधि में संबंधित अधिवक्ता बार एसोसिएशन की किसी भी गतिविधि में भाग नहीं ले सकेंगे।
इस कार्रवाई के बाद फतेहगढ़ बार में दो गुटों के बीच तनाव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। अधिवक्ताओं के बीच यह चर्चा भी तेज है कि आने वाले दिनों में मामला बार काउंसिल उत्तर प्रदेश तक पहुंच सकता है। बार राजनीति में बढ़ती गुटबाजी अब खुलकर सामने आने लगी है, जिससे संगठन की एकता पर भी सवाल उठ रहे हैं।


