नई दिल्ली। देश की न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर चल रही बहस के बीच भारत के युवाओं में उस समय भारी आक्रोश देखने को मिला, जब सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से वायरल हुआ कि देश के युवाओं और आम नागरिकों को “कॉकरोच” जैसी श्रेणी में रखकर टिप्पणी की गई। इस कथित टिप्पणी को लेकर छात्र संगठनों, प्रतियोगी परीक्षार्थियों और बेरोजगार युवाओं के बीच जबरदस्त नाराजगी फैल गई।
हालांकि इस मामले में आधिकारिक रिकॉर्ड और सत्यापित बयान को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसे लेकर लाखों पोस्ट शेयर किए गए। कई युवा संगठनों ने इसे “देश के संघर्षशील युवाओं का अपमान” बताया। इसी विवाद के बाद “कॉकरोच नेशनल जनता पार्टी ” जैसे प्रतीकात्मक अभियान और पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे।
देश में पहले से ही रोजगार, पेपर लीक और भर्ती घोटालों को लेकर युवा वर्ग में गुस्सा बना हुआ है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के विभिन्न आंकड़ों और श्रम बाजार रिपोर्टों के अनुसार देश में युवाओं की बेरोजगारी दर कई राज्यों में सामान्य औसत से कहीं अधिक बनी हुई है।
20 से 24 वर्ष आयु वर्ग में बेरोजगारी दर कई बार 40 प्रतिशत के आसपास दर्ज की गई।
लाखों पद सरकारी विभागों में वर्षों से खाली पड़े हैं।
पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी भर्ती परीक्षाएं पेपर लीक विवादों में फंसीं।
उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में प्रतियोगी छात्रों के आंदोलन लगातार बढ़े।
इन्हीं मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया पर युवाओं ने सवाल उठाना शुरू किया कि जब पढ़ा-लिखा युवा नौकरी मांगता है तो उसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया जाता।
सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ “युवा अपमान नहीं सहेगा”
विवाद के बाद एक्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर हजारों युवाओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी।
“डिग्री नहीं, सम्मान चाहिए”,
“पेपर लीक बंद करो”,
“रोजगार दो”,
और “युवा जाग चुका है” जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
कई वायरल पोस्टरों में झाड़ू, कॉकरोच और बेरोजगार युवाओं के प्रतीकों का इस्तेमाल कर व्यवस्था पर व्यंग्य किया गया। CNJP नाम से बने पोस्टरों में दावा किया गया कि अब युवा धर्म और जाति की राजनीति से हटकर रोजगार आधारित राजनीति करेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। यदि रोजगार, शिक्षा और अवसरों को लेकर असंतोष बढ़ता गया तो आने वाले समय में यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
भारत में लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की मानी जाती है। हर साल करोड़ों युवा रोजगार बाजार में प्रवेश करते हैं, लेकिन अवसर सीमित होने के कारण असंतोष तेजी से बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं को अपमानित महसूस कराने वाली कोई भी टिप्पणी या प्रतीकात्मक बहस तेजी से जनआक्रोश का रूप ले सकती है।
कई छात्र संगठनों और विपक्षी दलों से जुड़े नेताओं ने कहा कि देश का युवा आज रोजगार, शिक्षा और पारदर्शी भर्ती चाहता है, लेकिन राजनीतिक विमर्श लगातार दूसरे मुद्दों की ओर मोड़ा जा रहा है।
कुछ संगठनों ने मांग की कि सरकार और संस्थाओं को युवाओं की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और रोजगार संकट पर राष्ट्रीय स्तर पर ठोस नीति लानी चाहिए।
युवाओं के बीच वायरल हो रहे संदेशों में सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार और सम्मान बताया जा रहा है।
कई जगहों पर प्रतियोगी छात्रों ने कहा कि उन्हें जाति-धर्म की राजनीति नहीं बल्कि भर्ती कैलेंडर, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और रोजगार चाहिए।


