– दहेज, धोखाधड़ी और प्रताड़ना का आरोप
– जिले की सर्वोच्च कुर्सियों पर तैनात जिले में न्याय को भटकती बेटी
– कोतवाली पुलिस बोली, एसपी के पास जाओ, मामला मेडियेशन का
फर्रुखाबाद। प्रदेश में महिला सुरक्षा और “नारी शक्ति” के बड़े-बड़े दावों के बीच फर्रुखाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस व्यवस्था और महिला सुरक्षा अभियान दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दहेज उत्पीड़न, वैवाहिक धोखाधड़ी, अवैध संबंध छिपाकर शादी करने, जबरन गर्भपात कराने, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद पीड़िता की तहरीर तक लेने से फतेहगढ़ कोतवाली पुलिस द्वारा कथित रूप से इंकार किए जाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक और फतेहगढ़ कोतवाली प्रभारी को सम्बोधित शिकायती पत्र में गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता के अनुसार उसका विवाह 2 मार्च 2025 को रवि प्रताप सिंह निवासी दुर्गा कॉलोनी भोलेपुर, फतेहगढ़ के साथ हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। विवाह के बाद वह अपने पति के साथ गुरुग्राम में रहने लगी, जहां उसे पति के कथित अवैध संबंधों और दूसरी महिला के साथ पति-पत्नी जैसे संबंधों की जानकारी हुई।
पीड़िता का आरोप है कि विवाह से पहले उससे महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए गए और सुनियोजित तरीके से धोखे में रखकर शादी की गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विवाह के बाद उसके साथ लगातार मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक प्रताड़ना की गई। विरोध करने पर मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां दी जाती थीं।
पीड़िता ने अपने शिकायती पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि उस पर जबरन गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया और उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भ समाप्त कराया गया। घटना के बाद वह मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह टूट चुकी है। लेकिन उसका शिकायती पत्र है कोतवाली पुलिस में लेकर यह कहकर डाल दिया कि मामला मेडिएशन का है एसपी के पास जाओ हम कुछ नहीं कर सकते।
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि 3 जनवरी 2026 को उसने अपने पति को कथित रूप से दूसरी महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया था, जहां पुलिस भी पहुंची थी। हालांकि सामाजिक प्रतिष्ठा बचाने की उम्मीद में उस समय कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई, लेकिन इसके बाद प्रताड़ना और बढ़ गई।
पीड़िता का आरोप है कि पति रवि प्रताप सिंह, उसके पिता अनंग पाल सिंह सेंगर और अन्य ससुरालीजन लगातार धमकियां दे रहे हैं। उसे घर से निकाल दिया गया और शिकायत करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई।
सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर उठ रहा है कि जिले में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक दोनों महिला अधिकारी होने के बावजूद एक पीड़ित महिला की तहरीर तक कथित रूप से नहीं ली गई। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि यदि एक असहाय महिला को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए दर-दर भटकना पड़े, तो महिला सुरक्षा के दावे आखिर कितने प्रभावी हैं।
पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच, मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई और सुरक्षा की मांग करने की बात कही है। मामले में विवाह संबंधी दस्तावेज, चैट, ऑडियो-वीडियो और मेडिकल रिकॉर्ड जैसे साक्ष्य भी उपलब्ध कराए जाने का दावा किया गया है।


