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Monday, May 18, 2026

“जेल जाते गैंग को बचाने की जंग!”: पुलिस की सख्ती से बौखलाई रीता पाठक पहुंची डीएम दरबार

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– अपराधी पति अवधेश मिश्रा पर कार्यवाही पर एसपी फतेहगढ़ पर ही लगाए गंभीर आरोप
– पति के वसूली गैंग में विषकन्याओं का खुद करती रही नेतृत्व
– एसकेएम इंटर कॉलेज में अवैध ढंग से शासनादेश के विपरीत खुद प्रधानाचार्य

फर्रुखाबाद। जिले में लंबे समय से विवादों, दबंगई और कथित फर्जी मुकदमों को लेकर चर्चाओं में रहे कथित वकील अवधेश मिश्रा और उसके गैंग पर पुलिस का शिकंजा कसता दिखाई दे रहा है। इसी बीच सोमवार को नया मोड़ तब आ गया जब अवधेश मिश्रा की पत्नी रीता पाठक सीधे जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के दरबार पहुंच गईं और पुलिस अधीक्षक पर ही गंभीर आरोप जड़ डाले। पूरे घटनाक्रम के बाद कलेक्ट्रेट से लेकर कचहरी तक चर्चाओं का बाजार गर्म है।

फतेहगढ़ कचहरी में वर्षों से सक्रिय रहे अवधेश मिश्रा पर जमीन कब्जाने, विरोधियों को डराने-धमकाने और महिलाओं के जरिए झूठे छेड़छाड़ व गैंगरेप के मुकदमे दर्ज कराने जैसे गंभीर आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं। और पूर्व में कई मुकदमे भी दर्ज हुए हैं सूत्रों के अनुसार उसके खिलाफ विभिन्न थानों में करीब 10 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। हाल ही में उसके कथित गैंग से जुड़ी मीनू शर्मा को जहानगंज पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था, उसे मुकदमे में मुख्य आरोपी अवधेश मिश्रा ही है, जिसके बाद से पूरे नेटवर्क में हलचल हो गईं है।

चर्चाओं के अनुसार अवधेश मिश्रा फिलहाल उच्च न्यायालय से मिले स्थगनादेश के कारण गिरफ्तारी से बचा हुआ है, लेकिन दर्ज मुक़दमे में पुलिस की सख्ती लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में रीता पाठक का अचानक डीएम कार्यालय पहुंचकर पुलिस अधीक्षक के खिलाफ शिकायत करना कई सवाल खड़े कर रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रीता पाठक खुद भी विवादों से घिरी रही हैं। नवाबगंज थाना क्षेत्र में पूर्व में महिलाओं द्वारा मारपीट का मामला हो या एसकेएम इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य पद पर कथित अवैध नियुक्ति का विवाद उनका नाम कई मामलों में सामने आता रहा है। आश्चर्य की बात है, कॉलेज प्रबंधन समिति में कोषाध्यक्ष रहते हुए प्रधानाचार्य पद पर बैठना नियमों और शासनादेश के खिलाफ है और इस मामले में पूर्व में कार्रवाई की संस्तुति भी की जा चुकी है।
इलाके में यह चर्चा भी तेज है कि फर्जी मुकदमों के कथित नेटवर्क के संचालन में रीता की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। आरोप लगाए जाते रहे हैं कि वह गरीब और अशिक्षित महिलाओं को आगे कर विरोधियों पर गंभीर आरोप लगवाने की रणनीति तैयार करती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय और जांच एजेंसियों द्वारा होना बाकी है।
पूर्व जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह द्वारा अवधेश मिश्रा को “न्यूसेंस क्रिएटर” बताते हुए शासन को रिपोर्ट भेजे जाने की चर्चाएं भी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। बताया जाता है कि सरकारी कार्यों में बाधा डालने और दबाव की राजनीति करने के आरोप भी उस पर लगते रहे हैं।
अब जबकि पुलिस लगातार गैंग के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, ऐसे समय में रीता पाठक का पुलिस अधीक्षक के खिलाफ मोर्चा खोलना जिले की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में नई बहस छेड़ गया है। लोगों के बीच चर्चा है कि यह न्याय की लड़ाई है या फिर पुलिस कार्रवाई का दबाव कम कराने की रणनीति। जबकि हकीकत यह है कि अवधेश के फर्जी गैंग में विषकन्याओं का नेतृत्व उसकी पत्नी रीता मिश्रा पाठक ही करती रही आम शोहरत में रीता खुद बेहद झगड़ालू और आपराधिक प्रवृत्ति की महिला है जिससे पूर्व में कई पुलिस कर्मी ही आहत रहे हैं रीता का अपने मोहल्ले पालीवाल गली भोलेपुर में भी खास आतंक है पड़ोसियों का जीना दुभर किये है।
फिलहाल प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है, जबकि जिले में यह घटनाक्रम चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है। पता चला है कि जिलाधिकारी नहीं रीता के प्रार्थना पत्र पर जांच के आदेश दिए हैं।

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