35 C
Lucknow
Saturday, May 16, 2026

NEET पेपर लीक मामला : पुणे की ब्यूटीशियन गिरफ्तार, दो दिन पहले हिरासत में लिया गया था

Must read

पुणे: मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए कराए जाने वाले NEET परीक्षा के पेपर लीक मामले में CBI लगातार एक्शन मोड में नजर आ रही है। पहले इस लीक मामले के मास्टरमाइंड प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी को पुणे से अरेस्ट किया। पीवी कुलकर्णी NEET एग्जाम कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जुड़ा हुआ था। वहीं अब इस मामले में एजेंसी ने जाँच का दायरा बढ़ाते हुए पुणे (Pune) से एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है।

दरअसल, CBI ने दो दिन पहले पुणे से एक ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे को हिरासत में लिया था। उसके साथ धनंजय लोखंडे नाम के एक अन्य व्यक्ति को भी पकड़ गया था जिससे पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों का दावा है कि मनीषा वाघमारे के 21 बैंक खातों में करीब 10 लाख रुपये जमा किए गए थे और यह रकम NEET परीक्षा के दौरान ट्रांसफर हुई थी। जांच में सामने आया है कि, मनीषा छात्रों और उनके अभिभावकों से पैसे लेती थी और फिर इस पूरे नेटवर्क तक पहुंचाती थी।

जानकारी के मुताबिक CBI और पुणे पुलिस की क्राइम ब्रांच ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बुधवार तड़के पुणे के बिबवेवाड़ी इलाके से मनीषा वाघमारे को हिरासत में लिया गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार वह NEET-UG पेपर लीक मामले में तीसरी संदिग्ध आरोपी मानी जा रही है. बताया जा रहा है कि मनीषा पेशे से ब्यूटीशियन है, लेकिन जांच में उसके बैंक खातों में बड़ी संख्या में लेन-देन सामने आने के बाद एजेंसियों का शक गहरा गया।

इस मामले में सबसे बड़ा खुलासा मनीषा वाघमारे के बैंक खातों को लेकर हुआ है। जांच एजेंसियों को पता चला है कि उसके नाम से कुल 21 बैंक खाते संचालित हो रहे थे। इन खातों में करीब 10 लाख रुपये जमा किए गए थे। CBI सूत्रों के मुताबिक इन खातों में कई ट्रांजैक्शन NEET परीक्षा के आसपास हुए।

NEET पेपर लीक मामले में अब CBI ने पैसों के नेटवर्क पर खास फोकस किया है। एजेंसी को शक है कि यह पूरा रैकेट संगठित तरीके से काम कर रहा था और इसमें कई राज्यों के लोग शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार CBI मुख्यालय में हिरासत में लिए गए पांच आरोपियों से लगातार पूछताछ चल रही है। जांच एजेंसी बैंक ट्रांजैक्शन, ऑनलाइन पेमेंट, WhatsApp चैट और दूसरे कम्युनिकेशन रिकॉर्ड खंगाल रही है।

जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने छात्रों और अभिभावकों को गेस पेपर देने का दावा किया था। उनसे कहा गया था कि असली परीक्षा के 180 में से करीब 150 सवाल उन्हीं मॉक पेपर से आएंगे जो उन्हें उपलब्ध कराए जाएंगे.CBI को ऐसे सबूत भी मिले हैं जिनमें पेपर मैच होने की पुष्टि से पहले 30 हजार रुपये एडवांस लिए गए थे। यह भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया गया था, जांच एजेंसियों का मानना है कि इस नेटवर्क ने छात्रों की चिंता और मेडिकल सीट पाने की होड़ का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये कमाने की कोशिश की।

 

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article