– “जब हीरो-क्रिकेटर खुद बेच रहे ‘जल्दी अमीर बनने’ का सपना, तो युवाओं को सट्टेबाज़ी से दूर रखने के दावे कितने सच?”
सूर्या अग्निहोत्री
डिप्टी एडिटर यूथ इंडिया न्यूज ग्रुप
देश में बेटिंग ऐप्स पर कार्रवाई और प्रतिबंध की बातें बड़े जोर-शोर से की गईं। कहा गया कि युवाओं को ऑनलाइन सट्टेबाज़ी के जाल से बचाया जाएगा, मोबाइल स्क्रीन पर फैल रहे इस डिजिटल नशे पर लगाम लगेगी। लेकिन सवाल यह है कि अगर सच में सट्टेबाज़ी रोकनी थी, तो आज भी इंस्टाग्राम खोलते ही हर दूसरी-तीसरी रील में “प्रिडिक्शन लगाओ”, “टीम बनाओ”, “पैसे जीतो” जैसे लालच क्यों परोसे जा रहे हैं?
आज हालात यह हैं कि बच्चा-बच्चा मोबाइल चला रहा है। हर युवा इंस्टाग्राम, रील्स और सोशल मीडिया की दुनिया में घंटों डूबा रहता है। ऐसे में जब उसका पसंदीदा क्रिकेटर, फिल्म स्टार, कॉमेडियन या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर खुलेआम किसी “फैंटेसी”, “प्रिडिक्शन” या “कमाओ लाखों” वाले प्लेटफॉर्म का प्रचार करता दिखाई देता है, तो युवा के मन में लालच पैदा होना स्वाभाविक है। सरकार भले कहे कि बेटिंग ऐप्स बंद हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर इनका प्रचार पहले से ज्यादा तेज नजर आता है।
इतना ही नहीं, अब कई ऐसे प्लेटफॉर्म सामने आ गए हैं जो मोबाइल में इंस्टॉल भी नहीं होते। लोग सीधे Chrome या दूसरे ब्राउज़र पर वेबसाइट खोलकर अपनी आईडी बनाते हैं और वहीं पर रुपए लगाकर सट्टेबाज़ी करते हैं। यानी ऐप बंद होने के बावजूद खेल पूरी तरह जारी है, बस तरीका बदल गया है। यही वजह है कि कार्रवाई के दावों के बीच भी ऑनलाइन बेटिंग का जाल लगातार फैलता जा रहा है।
कुछ वेबसाइट्स और प्लेटफॉर्म आज भी “प्रिडिक्शन” के नाम पर रुपए लगवाकर लोगों को जीत का सपना दिखा रहे हैं। हारने वालों की कहानी कोई नहीं दिखाता, लेकिन जीत का झूठा सपना चमकदार विज्ञापनों और सेलिब्रिटीज के चेहरे से बेच दिया जाता है। यही वजह है कि हजारों युवा मेहनत के बजाय आसान पैसे की उम्मीद में इस दलदल की तरफ खिंचते चले जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर सट्टेबाज़ी जैसी चीज़ों को रोकना था, तो फिर सोशल मीडिया पर इनके प्रचार पर सख्ती क्यों नहीं? सिर्फ ऐप बंद कर देना और दूसरी तरफ इंस्टाग्राम पर उसी लालच को खुली छूट देना आखिर किस नीति का हिस्सा है? अगर हर दिन नए “सटोरिए” तैयार हो रहे हैं, तो फिर यह प्रतिबंध सिर्फ दिखावा नहीं तो और क्या है?
जब तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटीज और ऐसे डिजिटल जाल पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक “बेटिंग ऐप बंद” का दावा सिर्फ कागज़ों और भाषणों तक सीमित नजर आएगा।


