आगरा
आईजीआरएस और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर आने वाली जन शिकायतों के निस्तारण को लेकर आगरा प्रशासन की रिपोर्ट भले ही कागजों में बेहतर दिखाई दे रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। अप्रैल 2026 की मूल्यांकन रिपोर्ट में आगरा के जिलाधिकारी को प्रदेश के 75 जिलों में 33वीं रैंक प्राप्त हुई है। प्रशासन को कुल 140 में से 126 अंक यानी 90 प्रतिशत अंक मिले हैं, जिससे अधिकारियों के प्रदर्शन को संतोषजनक बताया गया। हालांकि, जनता के फीडबैक ने प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि 1,342 शिकायतकर्ताओं ने निस्तारण प्रक्रिया को असंतोषजनक बताया है।
रिपोर्ट के अनुसार प्रशासन ने शिकायतों के निस्तारण में कागजी स्तर पर तेजी दिखाई। उच्चाधिकारियों द्वारा श्रेणीकृत 136 शिकायतों और मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जांचे गए 25 संदर्भों में से कोई भी मामला ‘सी’ यानी खराब श्रेणी में नहीं पाया गया। शिकायतों की मार्किंग और अग्रसारण में औसतन मात्र 0.26 दिन का समय लगा, जिसे प्रशासनिक तत्परता का संकेत माना गया। इसके अलावा अधीनस्थ अधिकारियों के कार्यों के रैंडम परीक्षण में भी निर्धारित लक्ष्य से अधिक मामलों की जांच कर शत-प्रतिशत अंक हासिल किए गए।
हालांकि प्रशासन की असली परीक्षा जनता के फीडबैक में हुई, जहां तस्वीर पूरी तरह अलग दिखाई दी। अप्रैल माह में कुल 4,144 शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लिया गया, जिनमें से 2,802 लोगों ने कार्रवाई पर संतोष जताया, जबकि 1,342 लोगों ने निस्तारण को खराब बताया। यानी लगभग 32 प्रतिशत लोग प्रशासनिक कार्रवाई से संतुष्ट नहीं थे। यह आंकड़ा दर्शाता है कि शिकायतों के समाधान और जनता की अपेक्षाओं के बीच अब भी बड़ा अंतर बना हुआ है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुल 4,144 शिकायतकर्ताओं में से 695 लोगों से अधिकारियों ने शिकायत के निस्तारण से पहले या बाद में कोई संपर्क तक नहीं किया। हालांकि 3,449 लोगों से संपर्क किए जाने का दावा किया गया है। जिलाधिकारी कार्यालय और पुलिस कार्यालय ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक शिकायतों की फीडिंग और भौतिक सत्यापन कर बेहतर प्रदर्शन दिखाया। माह के अंत तक कुल 10,798 शिकायतों में से केवल 136 शिकायतें डिफॉल्टर श्रेणी में पाई गईं, जो कुल शिकायतों का 1.26 प्रतिशत रही।
इधर, शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर जिलाधिकारी मनीष बंसल ने सख्ती दिखाई है। किरावली क्षेत्र के एक लेखपाल को फर्जी रिपोर्ट लगाने पर निलंबित कर दिया गया, जबकि उजरई ग्राम पंचायत सचिव को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई। जल निगम (ग्रामीण) के अधिशासी अभियंता को गलत निस्तारण पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। समीक्षा बैठक में खराब फीडबैक पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को चेतावनी दी कि वे स्वयं शिकायतों की रैंडम जांच करें, अन्यथा अगली बैठक में उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


