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Tuesday, May 12, 2026

डॉ. के. विक्रम राव की प्रथम पुण्यतिथि पर पत्रकारिता के भविष्य पर मंथन

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– वरिष्ठ पत्रकारों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

– बोले एच. एन. शर्मा – श्री राव का जीवन रहा क्रांतिकारी

 

लखनऊ। यूपी प्रेस क्लब में मंगलवार को वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय डॉ. के. विक्रम राव की प्रथम पुण्यतिथि पर आयोजित संगोष्ठी में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, भाषा की गिरती शुद्धता और शीर्षकों की गंभीरता पर गहन चर्चा हुई। “पत्रकारिता के 200 वर्ष : शीर्षक, वर्तनी और भाषा” विषय पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में प्रदेश भर के वरिष्ठ पत्रकारों, संपादकों और मीडिया जगत से जुड़े बुद्धिजीवियों ने भाग लेकर डॉ. राव के योगदान को याद किया।

 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के राजनीतिक सलाहकार रहे एच.एम. शर्मा ने कहा कि डॉ. के. विक्रम राव केवल पत्रकार नहीं थे, बल्कि पत्रकारिता की आत्मा थे। उन्होंने कहा कि आज जब पत्रकारिता बाजारवाद और राजनीतिक प्रभावों के दबाव में संघर्ष कर रही है, तब डॉ. राव जैसे निर्भीक और भाषाई अनुशासन वाले पत्रकारों की कमी साफ महसूस होती है।

 

एच.एम. शर्मा ने अपने संबोधन में डॉ. राव के जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने ट्रेड यूनियन आंदोलन से लेकर हिंदी पत्रकारिता की गरिमा बचाने तक हर मोर्चे पर संघर्ष किया। वे पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व मानते थे। शर्मा ने कहा कि डॉ. राव की लेखनी सत्ता से सवाल पूछने वाली और आम जनमानस की आवाज को मंच देने वाली थी।

 

संगोष्ठी में वक्ताओं ने चिंता जताई कि डिजिटल दौर में समाचारों की भाषा और शीर्षकों की गंभीरता लगातार कमजोर हो रही है। कई वरिष्ठ पत्रकारों ने कहा कि टीआरपी और क्लिकबाजी की दौड़ में पत्रकारिता की मूल आत्मा प्रभावित हो रही है। वक्ताओं ने डॉ. राव के भाषाई अनुशासन और तथ्यपरक पत्रकारिता को नई पीढ़ी के लिए आदर्श बताया।

 

कार्यक्रम का आयोजन डॉ. राव की स्मृति में उनके पुत्र एवं पत्रकार के. विश्वदेव राव सहित आयोजक मंडल द्वारा किया गया। इस दौरान यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी, यूपी प्रेस क्लब के अध्यक्ष रवीन्द्र सिंह, वरिष्ठ पत्रकार शिव शरण सिंह, रतिभान त्रिपाठी, प्रेम कान्त तिवारी, देवराज सिंह, रजत मिश्रा और नितिन श्रीवास्तव समेत बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।

 

संगोष्ठी के अंत में दो मिनट का मौन रखकर डॉ. के. विक्रम राव को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में मौजूद पत्रकारों ने उनके सिद्धांतों और निष्पक्ष पत्रकारिता की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया।

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