– बंगाल की राजनीति में भूचाल
कोलकाता।वेस्ट बंगाल की राजनीति एक बार फिर बड़े विवाद और टकराव के केंद्र में आ गई है। भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए ) से जुड़े चर्चित हत्याकांड की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टीगेशन को सौंप दी गई है। मामले के सीबीआई तक पहुंचते ही राज्य की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू हो गया है।
इस मामले ने इसलिए भी राजनीतिक तूल पकड़ लिया क्योंकि भाजपा लगातार आरोप लगाती रही कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा चरम पर है और राज्य पुलिस निष्पक्ष जांच करने में विफल रही। दूसरी ओर सत्तारूढ़ आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस इसे भाजपा का “राजनीतिक नैरेटिव” बता रही है।
जानकारी के मुताबिक हाईप्रोफाइल हत्याकांड के बाद भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए थे। मामला अदालत तक पहुंचा, जिसके बाद जांच को लेकर निष्पक्षता की मांग तेज हुई। अब सीबीआई जांच के आदेश ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया है।
बंगाल में राजनीतिक हिंसा के आंकड़े फिर चर्चा में
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का मुद्दा पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा विषय रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबबी ) और विभिन्न राजनीतिक दलों के दावों के अनुसार राज्य में चुनावी हिंसा, पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले और राजनीतिक हत्याओं के मामलों को लेकर लगातार बहस होती रही है।
2021 विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा ने दावा किया था कि उसके सैकड़ों कार्यकर्ताओं पर हमले हुए, जबकि कई लोगों की हत्या तक कर दी गई। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने भी अपने कार्यकर्ताओं पर हमलों का आरोप लगाया। राज्य में पंचायत चुनावों और लोकसभा चुनावों के दौरान भी हिंसा की घटनाएं सुर्खियों में रहीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल की राजनीति में “कैडर कल्चर” और जमीनी संघर्ष लंबे समय से सत्ता की लड़ाई का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में किसी बड़े राजनीतिक चेहरे से जुड़े व्यक्ति की हत्या का मामला सीधे सत्ता और विपक्ष के बीच संघर्ष का केंद्र बन जाता है।
भाजपा नेताओं ने सीबीआई जांच का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं रह गया था। पार्टी नेताओं का आरोप है कि अगर केंद्रीय एजेंसी जांच नहीं करती तो सच्चाई सामने नहीं आती। भाजपा इस मुद्दे को कानून-व्यवस्था और राजनीतिक सुरक्षा से जोड़कर राज्य सरकार को घेर रही है।
वहीं ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि हर संवेदनशील मामले को राजनीतिक रंग देकर बंगाल की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।
अब इस मामले में सीबीआई डिजिटल साक्ष्य, कॉल डिटेल, वित्तीय लेनदेन, राजनीतिक कनेक्शन और स्थानीय नेटवर्क की गहराई से जांच कर सकती है। जांच एजेंसी संबंधित पुलिस अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ कर सकती है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि जांच में राजनीतिक संरक्षण, साजिश या संगठित नेटवर्क के संकेत मिले तो मामला और बड़ा रूप ले सकता है। बंगाल में पहले भी कई चर्चित मामलों की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद राज्य और केंद्र के बीच टकराव बढ़ता रहा है।
फिलहाल बंगाल की राजनीति में यह मामला नया विस्फोट बन चुका है। विपक्ष इसे “राजनीतिक आतंक” का उदाहरण बता रहा है, जबकि सत्तापक्ष भाजपा पर “राजनीतिक ड्रामा” करने का आरोप लगा रहा है। आने वाले दिनों में सीबीआई की जांच रिपोर्ट और कार्रवाई पर पूरे देश की नजर टिकी रहेगी।


