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Monday, May 11, 2026

जिला पंचायत में इस बार दिख सकता है ऐतिहासिक बदलाव, भाजपा में अंदरखाने बढ़ रही नाराजगी

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टिकट वितरण, गुटबाजी और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली से कार्यकर्ताओं में असंतोष की चर्चा तेज

फर्रुखाबाद ।आगामी जिला पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होनें लगीं हैं। सत्ता पक्ष में होने के बावजूद भाजपा के भीतर अंदरखाने असंतोष और गुटबाजी की चर्चाएं तेजी से सामने आने लगी हैं। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि इस बार जिला पंचायत में बड़ा और “ऐतिहासिक बदलाव” देखने को मिल सकता है।

गहन राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक भाजपा के कई पुराने कार्यकर्ता और स्थानीय जिला पंचायत की कार्यशैली से लगातार असंतुष्ट रहे हैं कुछ बीजेपी नेता अबकी टिकट वितरण की संभावित रणनीति और प्रभावशाली चेहरों की बढ़ती पकड़ से नाराज बताए जा रहे हैं। अंदरखाने यह चर्चा भी है कि चुनाव में इसका सीधा असर दिखाई देना तय है ।
सबसे बड़ा कारण स्थानीय स्तर पर जिला पंचायत में पुराने दागी सपाइयों का हावी रहना, कमीशन की व्यापक बढ़ोत्तरी और गुटबाजी को बढ़ावा माना जा रहा है।

सूत्र बताते हैं कि कई बीजेपी कार्यकर्ताओं में यह भावना भी बढ़ रही है कि जमीन पर वर्षों से काम करने वाले लोगों की अनदेखी कर “प्रभावशाली और संसाधन संपन्न” चेहरों को प्राथमिकता दी गईं है। यही वजह है कि अंदरखाने नाराजगी लगातार बढ़ती ही गईं ।

मंत्रिमंडल विस्तार में जिले को अपेक्षित प्रतिनिधित्व न मिलने, स्थानीय विकास मुद्दों और कुछ जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली को लेकर भी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है। कई लोग मानते हैं कि जनता के बीच बढ़ती दूरी और अधिकारियों पर कमजोर पकड़ ने भाजपा की छवि को स्थानीय स्तर पर प्रभावित किया है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिला पंचायत चुनाव केवल स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं होता, बल्कि यह विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल का संकेत भी माना जाता है। ऐसे में यदि भाजपा के भीतर असंतोष बढ़ता है तो विपक्ष इसे बड़े अवसर के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश करेगा।

सूत्रों के अनुसार विपक्षी दल भी भाजपा के असंतुष्ट नेताओं और स्थानीय समीकरणों पर नजर बनाए हुए हैं। खासकर समाजवादी पार्टी और क्षेत्रीय समूह इस बार जिला पंचायत में सत्ता पक्ष को कड़ी चुनौती देने की तैयारी में जुटे हैं।

हालांकि भाजपा संगठन के करीबी लोग दावा कर रहे हैं कि पार्टी नेतृत्व सभी समीकरणों पर नजर बनाए हुए है और चुनाव से पहले संगठनात्मक स्तर पर आवश्यक संतुलन बना लिया जाएगा। लेकिन अंदरखाने जिस तरह की हलचल दिखाई दे रही है, उसने जिले की राजनीति को और दिलचस्प बना दिया है।

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