तीन एक्सप्रेसवे से जोड़ने की ऐतिहासिक योजना, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से बदलेगी जिले की तस्वीर
शरद कटियार
योगी आदित्यनाथ की सरकार अब फर्रुखाबाद को केवल एक सामान्य जनपद नहीं बल्कि आने वाले समय की औद्योगिक और पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित करने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। पौराणिक महत्व और “अपरा काशी” की पहचान रखने वाले फर्रुखाबाद की बदहाल व्यवस्थाओं का संज्ञान स्वयं मुख्यमंत्री स्तर पर लिया गया, जिसके बाद जिले में प्रशासनिक और विकासात्मक गतिविधियों की रफ्तार अचानक तेज होती दिखाई देने लगी है।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार फर्रुखाबाद से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा स्वंम कर रहे हैं। यही कारण है कि जनपद में तेज-तर्रार और सख्त प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती सीधे शासन स्तर की प्राथमिकता बन गई है। अपराध, भू-माफिया, सट्टा नेटवर्क और भ्रष्टाचार पर लगातार कार्रवाई ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि सरकार फर्रुखाबाद की छवि बदलने के मिशन में पूरी ताकत से जुट चुकी है।
प्रदेश की औद्योगिक नीति के तहत फर्रुखाबाद को बड़ी सौगात देते हुए सरकार ने ऐसा रोडमैप तैयार किया है, जो आने वाले वर्षों में जिले को राष्ट्रीय औद्योगिक नक्शे पर मजबूत पहचान दिला सकता है। पूरे उत्तर प्रदेश में अधिकांश जनपद किसी न किसी एक्सप्रेसवे से 30 से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, लेकिन फर्रुखाबाद के लिए सरकार ने इससे कहीं आगे बढ़कर सोच दिखाई है। जनपद को एक नहीं बल्कि तीन बड़े एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जोड़ने की ऐतिहासिक योजना पर काम तेज हो चुका है।
बताया जा रहा है कि इस महत्वाकांक्षी लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना को आगे बढ़ाने में सुरेश कुमार खन्ना की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शासन स्तर पर उनके विशेष आग्रह और पैरवी के बाद फर्रुखाबाद को यह बड़ा उपहार मिला, जिसने जिले के व्यापारिक और औद्योगिक भविष्य की नई संभावनाएं खोल दी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह परियोजना तय समयसीमा में पूरी हुई तो फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले जिलों में शामिल हो सकता है।
सरकार की सबसे बड़ी तैयारी उस विशाल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को लेकर मानी जा रही है, जिसकी रूपरेखा खिमसेपुर मोहम्मदाबाद से लेकर शुकरुल्लापुर तक तैयार की जा रही है। शासन सूत्रों के मुताबिक यह कॉरिडोर केवल औद्योगिक क्षेत्र नहीं होगा बल्कि रोजगार, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, छोटे-मझोले उद्योग और निवेश का बड़ा केंद्र बनेगा। कहा जा रहा है कि इसकी संरचना नोएडा मॉडल की तर्ज पर विकसित किए जाने की योजना है, जिससे आने वाले वर्षों में फर्रुखाबाद को औद्योगिक क्रांति के रूप में नई पहचान मिल सकती है।
इस परियोजना से जिले के हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना जताई जा रही है। अब तक पलायन और बेरोजगारी से जूझ रहे जनपद के लिए यह योजना गेमचेंजर साबित हो सकती है। एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के कारण परिवहन लागत कम होगी, निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और राष्ट्रीय स्तर की कंपनियों के आने का रास्ता खुलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फर्रुखाबाद की व्यवस्थाओं को सीधे पटरी पर लाने के लिए विशेष रणनीति के तहत जयवीर सिंह को जिले का प्रभारी मंत्री बनाया। राजनीतिक गलियारों में इसे बेहद महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। सरकार का फोकस केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है बल्कि पर्यटन, धार्मिक विरासत, उद्योग और आधारभूत ढांचे को एक साथ विकसित करने की व्यापक योजना पर काम हो रहा है।
संकिसा, पांचाल घाट गंगा तट, पौराणिक धरोहरों और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों को लेकर भी शासन गंभीर दिखाई दे रहा है। माना जा रहा है कि पर्यटन और उद्योग का संयुक्त मॉडल फर्रुखाबाद को नई आर्थिक ताकत देगा। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता सूची में शामिल होने के बाद जिले में प्रशासनिक मशीनरी भी अधिक सक्रिय नजर आने लगी है।
जनपद के राजनीतिक और सामाजिक जानकारों का कहना है कि वर्षों तक उपेक्षा झेलने वाला फर्रुखाबाद अब सीधे मुख्यमंत्री की निगरानी में नई दिशा की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। यदि योजनाएं धरातल पर उतरीं तो आने वाले कुछ वर्षों में यही फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित औद्योगिक और निवेश केंद्रों में गिना जा सकता है।


