कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव तय हो गया है, जहां पहली बार भारतीय जनता पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में नजर आ रही है। वहीं करीब 15 वर्षों से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बाहर होना पड़ा है। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए।
ममता बनर्जी ने साफ तौर पर कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगी, क्योंकि उनकी हार जनादेश से नहीं बल्कि साजिश के तहत हुई है। उन्होंने कहा कि वह चुनाव नहीं हारी हैं, इसलिए पद छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता। साथ ही उन्होंने चुनौती दी कि यदि कोई कार्रवाई करनी है तो संवैधानिक नियमों के तहत की जाए।
हालांकि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई मुख्यमंत्री चुनाव हारने या बहुमत खोने के बाद भी इस्तीफा देने से इनकार करता है, तो स्थिति को कानून के तहत सुलझाया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही मौजूदा सरकार का अस्तित्व स्वतः खत्म हो जाता है। पश्चिम बंगाल में मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई तक ही है, जिसके बाद सरकार स्वतः समाप्त मानी जाएगी और मुख्यमंत्री पद भी स्वतः रिक्त हो जाएगा।
इसके बाद राज्यपाल नई सरकार के गठन के लिए सबसे बड़े दल को आमंत्रित करेंगे। नई सरकार के शपथ ग्रहण के साथ ही पुरानी सरकार पूरी तरह समाप्त हो जाती है। वहीं यदि बहुमत को लेकर किसी तरह का विवाद होता है, तो राज्यपाल फ्लोर टेस्ट कराने का निर्देश दे सकते हैं या जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति शासन की संस्तुति भी कर सकते हैं।
ऐसे में स्पष्ट है कि भले ही ममता बनर्जी इस्तीफा न दें, लेकिन संवैधानिक प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल में नई सरकार का गठन तय है और सत्ता परिवर्तन अब केवल औपचारिकता भर रह गया है।


