लखनऊ। ‘श्रमवीर गौरव समारोह-2026’ के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मजदूरों को “नए भारत का शिल्पकार” बताते हुए उनके सम्मान और अधिकारों की बात तो जोरदार अंदाज़ में कही, लेकिन सवाल यह है कि क्या जमीनी स्तर पर हालात सच में बदल रहे हैं या सिर्फ मंचों तक ही सीमित हैं?
सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि श्रमिक हर परिस्थिति में काम करता है चाहे लू हो, बारिश हो या कठिन हालात वह न रुकता है, न थकता है। उन्होंने भावनात्मक अंदाज़ में कहा कि मजदूरों के पसीने की हर बूंद इस धरती को “सोना उगलने” लायक बनाती है। लेकिन इसी भाषण में उन्होंने उन कड़वी सच्चाइयों को भी स्वीकार किया, जो वर्षों से सिस्टम की नाकामी को उजागर करती रही हैं।
मुख्यमंत्री ने खुलकर कहा कि जिन मजदूरों ने दूसरों के लिए घर बनाए, उनके खुद के सिर पर छत नहीं थी। जो दूसरों के लिए शौचालय बनाते रहे, उनके परिवार सड़क किनारे सम्मान खोते रहे। जो देश का अन्न पैदा करते हैं, उनके बच्चे भूख से जूझते हैं। और जो अस्पताल बनाते हैं, उन्हें खुद इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ता है।
यही बयान अब सरकार के लिए सबसे बड़ा सवाल बनता है—अगर यह सच्चाई है, तो आखिर इतने वर्षों तक योजनाएं जमीन पर क्यों नहीं उतरीं?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में करोड़ों श्रमिक असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, लेकिन श्रम विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण और वास्तविक लाभार्थियों के बीच भारी अंतर सामने आता रहा है। कई जिलों में श्रमिकों को न तो समय पर मजदूरी मिल रही है, न ही आवास योजनाओं का लाभ। फर्रुखाबाद, हरदोई, कन्नौज जैसे जिलों में ‘श्रमिक कल्याण योजनाओं’ की फाइलें आगे बढ़ती जरूर हैं, लेकिन जमीन पर असर बेहद सीमित दिखाई देता है।
युवाओं के लिए भी यह बड़ा सवाल है सरकार स्किल डेवलपमेंट और रोजगार की बात कर रही है, लेकिन क्या इन योजनाओं से वास्तव में स्थायी रोजगार मिल पा रहा है या सिर्फ ट्रेनिंग सर्टिफिकेट तक ही सीमित हैं?
कार्यक्रम में सरकार ने श्रमिकों के लिए आवास, स्वास्थ्य और डिजिटल सुविधाओं के विस्तार की बात कही, लेकिन पिछले वर्षों में भी इसी तरह की घोषणाएं हुई थीं। कई परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं और कई जगहों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी सामने आए हैं।
श्रमिकों का ‘सम्मान’श्रमवीर गौरव समारोह में गरजे सीएम योगी


