फर्रुखाबाद। गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर जिले में उठे सियासी तूफान के बीच सांसद मुकेश राजपूत ने तीखे तेवर अपनाते हुए विरोधियों पर सीधा हमला बोला। मीडिया और सोशल मीडिया में चल रही बयानबाजी पर पलटवार करते हुए उन्होंने साफ कहा कि एक्सप्रेसवे का रूट बदलना कोई राजनीतिक साजिश नहीं, बल्कि “तकनीकी मजबूरी” का नतीजा है।
सांसद ने दो टूक शब्दों में कहा कि पहले भी स्पष्ट किया जा चुका है कि कुछ तकनीकी कारणों के चलते गंगा एक्सप्रेसवे फर्रुखाबाद से होकर नहीं गुजर सका। संभल और चित्रकूट जैसे जिलों को जोड़ने में कई तकनीकी अड़चनें सामने आईं, जिनके चलते यह निर्णय लिया गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “कुछ लोग बेवजह भ्रम फैला रहे हैं, जबकि हकीकत बिल्कुल अलग है।”
उन्होंने यह भी साफ किया कि जिले को नजरअंदाज नहीं किया गया है। गंगा एक्सप्रेसवे से फर्रुखाबाद को जोड़ने के लिए लिंक रोड बनाई जाएगी, जिससे जनपद को सीधा और ठोस लाभ मिलेगा। सांसद के अनुसार, “यह एक बड़ी उपलब्धि है, जिसे जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।”
विरोधियों पर हमला तेज करते हुए मुकेश राजपूत ने कहा कि यह पूरा मुद्दा राजनीतिक इशारे पर उछाला जा रहा है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे एनजीटी के दस्तावेज पढ़ें, जिससे सच्चाई खुद सामने आ जाएगी।
सांसद ने जनप्रतिनिधियों की क्षमता पर उठ रहे सवालों को भी खारिज करते हुए कहा कि “कोई भी जनप्रतिनिधि कमजोर नहीं है, हर किसी की अपनी ताकत है। अगर ताकत नहीं होती तो जिले में इतने विकास कार्य कैसे होते?”
इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। बोले, “जब लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे बना और कन्नौज तक सीमित रह गया, तब फर्रुखाबाद को क्यों नहीं जोड़ा गया? उस समय तो जिले के चारों विधायक सपा के थे, उनकी ताकत कहां चली गई थी?”
सांसद ने जिले में हुए विकास कार्यों ओवरफ्लाई, बिजली घर और अन्य परियोजनाओं का जिक्र करते हुए दावा किया कि फर्रुखाबाद लगातार विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जिलाध्यक्ष फतेहचंद वर्मा, वरिष्ठ नेता जितेंद्र सिंह राजावत और मीडिया प्रभारी शिवांग रस्तोगी समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।


