कतर की चेतावनी होर्मुज जलडमरूमध्य को सौदेबाजी का हथियार न बनाया जाए
तेहरान
अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक गतिरोध के बीच पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कतर ने गंभीर चिंता जताते हुए इसे किसी भी तरह की राजनीतिक सौदेबाजी से दूर रखने की अपील की है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने स्पष्ट कहा कि यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की जीवनरेखा है, इसलिए इसकी सुरक्षा और स्थिरता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने चेताया कि शांति वार्ता ठप होने के बावजूद समुद्री मार्गों को भू-राजनीतिक दबाव का साधन बनाना पूरी दुनिया के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
इसी बीच ईरान ने अपने कड़े रुख को दोहराते हुए कहा है कि मौजूदा हालात अब भी युद्ध जैसे बने हुए हैं। ईरानी सेना के प्रवक्ता के मुताबिक, देश की सुरक्षा एजेंसियां हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ईरान ने अपने विरोधियों को चेतावनी दी है कि किसी भी नई कार्रवाई का जवाब नए हथियारों और रणनीतियों के साथ दिया जाएगा।
दूसरी ओर संयुक्त राज्य अमेरिका में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है। ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन 1973’ के तहत राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई के 60 दिनों के भीतर कांग्रेस की मंजूरी लेनी होती है। बताया जा रहा है कि 1 मई तक मंजूरी न मिलने पर अमेरिका को अपने सैन्य अभियान पर रोक लगानी पड़ सकती है, हालांकि अतीत में इस कानून की अलग-अलग व्याख्याएं भी सामने आती रही हैं।
तनाव के बीच ईरान एक नई शांति पहल पर भी काम कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के माध्यम से मध्यस्थता कर युद्ध समाप्त करने का नया प्रस्ताव जल्द पेश किया जा सकता है, क्योंकि पहले दिए गए प्रस्ताव को अमेरिकी नेतृत्व ने स्वीकार नहीं किया था।
वहीं, अमेरिकी सेना ने समुद्री नाकेबंदी के दौरान एक संदिग्ध व्यापारिक जहाज “ब्लू स्टार III” की तलाशी ली। जांच के बाद जब यह स्पष्ट हुआ कि जहाज का ईरान के बंदरगाहों से कोई संबंध नहीं है, तो उसे आगे बढ़ने की अनुमति दे दी गई। अमेरिका द्वारा शुरू की गई इस नाकेबंदी का उद्देश्य ईरान पर दबाव बनाना बताया जा रहा है।
इसी क्रम में भारत में ईरान के प्रतिनिधि डॉ. मोहम्मद हुसैन जियाईनिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की चेतावनी अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है और इस पर वैश्विक संस्थाओं की चुप्पी चिंताजनक है।
उधर, इज़राइल और दक्षिण लेबनान के बीच भी तनाव बढ़ गया है। इज़राइली हवाई हमलों में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की खबर है। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि अब लेबनान में ड्रोन ठिकाने उनके निशाने पर होंगे, जिससे क्षेत्र में संघर्ष और तेज होने की आशंका है।
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, ऐसे में दुनिया की निगाहें अब आगामी कूटनीतिक कदमों पर टिकी हुई हैं।


