लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क संपर्क को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए गंगा एक्सप्रेसवे के बाद अब 11 नए एक्सप्रेसवे और लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर काम शुरू कर दिया गया है। इन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, जिसे इसी वर्ष पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरदोई में 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के साथ ही प्रदेश का एक्सप्रेसवे नेटवर्क तेजी से विस्तार करेगा। इसके शुरू होने के बाद राज्य में संचालित एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 1910 किलोमीटर तक पहुंच जाएगी, जो लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद 1973 किलोमीटर हो जाएगी।
प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 तक एक्सप्रेसवे नेटवर्क को बढ़ाकर 3200 किलोमीटर तक पहुंचाना है। इससे उत्तर प्रदेश देश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क के मामले में अग्रणी राज्य बना रहेगा और इसकी हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी।
गंगा एक्सप्रेसवे, जो मेरठ से प्रयागराज तक 12 जिलों और 519 गांवों से होकर गुजरता है, प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को सीधे जोड़ने का काम करेगा। करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत से बने इस छह लेन (भविष्य में आठ लेन) एक्सप्रेसवे से औद्योगिक विकास, व्यापार और आवागमन को नई गति मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, नए एक्सप्रेसवे बनने से निवेश को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
गंगा एक्सप्रेसवे के बाद यूपी में 11 नए एक्सप्रेसवे की तैयारी, 2029 तक 3200 किमी नेटवर्क का लक्ष्य


